ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोकोक्तियाँ और कहावते प्रचलित होती हैं. ये गूढ़ अर्थ युक्त होते हैं. बचपन में सुनी एक इसी तरह की कुछ पंक्तियाँ :
"धनिया कहे पियाजी से
सुन लेहसुन मोर बात
सोआ रहा जब पालकी में
जीव गाजर हो जात"
अर्थात धनिया अपने पिया जी से कहती है कि आप मेरी बात सुन लीजिये. जब मैं शादी के बाद घर आते समय आपके साथ पालकी में सोई थी तो मैं अत्यंत लाजमयी हो गई थी.
धनिया : मसाला / धनिया नाम की स्त्री
पियाजी : पिया जी/ प्याज
लेहसुन : लेहसुन / सुन लो
सोआ : सोई / पालक के साथ उगने वाला साग
जीव गाजर हो जात : जी बहुत लजाता था / गाजर







