नजर मिली नजर झुकी कथोपकथन हो गया मन बावरा न जाने किन ख्वाबों में खो गया . ‘पत्थर’ ने पत्थर मारा चोट लगी ‘पत्थर’ को पत्थरमय फिर आसमान हो गया ‘पत्थर’ भी भागे घर को . जुल्म को कभी सह मत गलत से न हो कभी सहमत .
धूप में भूखा-प्यासा जलता रहा सूरज फिर भी पूरे दिन चलता रहा सूरज . तुम्हारी चुप्पी के उस कथन को सुनता रहा मैं. सुन न पाया तदुपरांत जो कुछ कहती रही तुम. . कार्यालय के पिछली गेट से निकल गए पार्टी प्रवर्तक मुख्य द्वार पर ठगे से खड़े रह गए सम अर्थक