नजर मिली
नजर झुकी
कथोपकथन हो गया
मन बावरा
न जाने किन ख्वाबों में
खो गया
.
‘पत्थर’ ने
पत्थर मारा
चोट लगी
‘पत्थर’ को
पत्थरमय फिर
आसमान हो गया
‘पत्थर’ भी भागे
घर को
.
जुल्म को कभी
सह मत
गलत से
न हो कभी
सहमत
.
निरावेशन की शून्यता मुझे मंजूर नहीं है ....
नजर मिली
नजर झुकी
कथोपकथन हो गया
मन बावरा
न जाने किन ख्वाबों में
खो गया
.
‘पत्थर’ ने
पत्थर मारा
चोट लगी
‘पत्थर’ को
पत्थरमय फिर
आसमान हो गया
‘पत्थर’ भी भागे
घर को
.
जुल्म को कभी
सह मत
गलत से
न हो कभी
सहमत
.
चलो मान लिया
कि तुम नहीं
दृष्टिहीन हो,
जब तुम्हारे अंदर
दृष्टि ही न हो
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बिछा रखा था
जिसके लिये
हर राह में आईना
आस टूटने लगी है
अब तक तो वो
आई ना
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ओ री सखी !
अब तो शुरू कर दे
सजना
आ ही रहे होंगे
तुम्हारे
सजना
धूप में
भूखा-प्यासा
जलता रहा सूरज
फिर भी
पूरे दिन
चलता रहा सूरज
.
तुम्हारी चुप्पी के
उस कथन को
सुनता रहा मैं.
सुन न पाया
तदुपरांत जो कुछ
कहती रही तुम.
.
कार्यालय के
पिछली गेट से निकल गए
पार्टी प्रवर्तक
मुख्य द्वार पर
ठगे से खड़े रह गए
सम अर्थक