रविवार, 24 मई 2009

दो शब्द चित्र (2)


घर के खपरैलों से
आंगन की देहरी पर
धूप यूं पॉव धरती है
जैसे कोई नवेली
हौले हौले
सीढियाँ उतरती है










रास्ते क्या
नज़र नहीं आते?
सुबह के भूले
इन दिनों शाम तक
घर नहीं आते

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