प्रवाह

निरावेशन की शून्यता मुझे मंजूर नहीं है ....

मंगलवार, 4 अगस्त 2026

बिना हस्ताक्षर की वसीयत

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उसने एक लिफ़ाफ़ा थमाया था मुझे। कहा — " इसमें मेरे दिल की वसीयत है , जो तुम्हारे नाम है।" मैंने भी बड़ी नफ़ासत से उसे सहेजकर रख लि...
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बुधवार, 29 जुलाई 2026

अनकही राहें

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  आम तौर पर तुम अपने सारे बाल जूड़े में बाँध लेती हो। फिर भी कुछ लटें   हर बार मुक्त रह जाती हैं। शायद तुम्हें इसका अहसास भी न हो ,...
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गुरुवार, 23 जुलाई 2026

हार की जीत

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हर तकरार में यूँ तो तुमसे हार जाता हूँ , और तुम हर बार पूरे कमरे में जीत की मुस्कान लिए फिरती हो।   तुम्हें कभी यह जाहिर नहीं होने ...
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शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

रक्ताभ कलाई

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  अभी-अभी लौटा हूँ एक तीर्थयात्रा से। हाँ , यह बात अलग है कि उस यात्रा में मैं न किसी मंदिर गया , न मस्जिद , न गुरुद्वारे। शायद तुम...
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शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

ज़द से बाहर

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  तुम्हारी सोहबत का ही असर था , कि मैं लड़खड़ा रहा था। मेरी इसी लड़खड़ाहट को देखकर ट्रैफिक पुलिस ने मुझे रोक लिया। मुँह से लगाया ब्रेथ...
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मंगलवार, 23 जून 2026

चुना हुआ मौन

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आदमी देख नहीं सकता, यदि आँखें न हों। सुन नहीं सकता, यदि कान न हों। बोल नहीं सकता, यदि मुँह न हो। लेकिन— आँखें होते हुए भी जो देखता ...
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रविवार, 7 अप्रैल 2019

मतदान करो

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चंगों को; नंगों को; बनावटी भिखमंगों को, कभी भी मत दान करो सुशासन के लिए; स्वच्छ प्रशासन के लिए बिना चूके मतदान करो
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मंगलवार, 26 जून 2012

पत्थरों के गाँव में ठहरने लगा है आईना …..

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तेरी गली से होकर गुजरने लगा है आईना तेरी हर आहट पर संवरने लगा है आईना . लटें संवार कर तुम चली गयी पल भर में जाने क्या सोच...
31 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 11 मई 2012

जब से पत्थर इतने रंगीले हो गए …

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आईनों के चेहरे पीले हो गए जब से पत्थर इतने रंगीले हो गए . आईना टूटकर बिखर जाता है जब भी खुद को आईने के सामने पाता है . आईना उनक...
18 टिप्‍पणियां:
रविवार, 29 अप्रैल 2012

कथोपकथन हो गया …..

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नजर मिली नजर झुकी कथोपकथन हो गया मन बावरा न जाने किन ख्वाबों में खो गया . ‘पत्थर’ ने पत्थर मारा चोट लगी ‘पत्थर’ को पत्थरमय फिर...
10 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 16 अप्रैल 2012

अब तक तो वो आई ना

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चलो मान लिया कि तुम नहीं दृष्टिहीन हो, पर फायदा क्या जब तुम्हारे अंदर दृष्टि ही न हो ************* बिछा रखा था जिसके लिये हर राह...
7 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 7 अप्रैल 2012

तीन स्थितियां तीन शब्द चित्र

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धूप में भूखा-प्यासा जलता रहा सूरज फिर भी पूरे दिन चलता रहा सूरज . तुम्हारी चुप्पी के उस कथन को सुनता रहा मैं. सुन न पाया तद...
5 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 17 जून 2011

अब तक संचित वह क्षण ..

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तब जबकि तुम्हारे काँपते हाथों पर मैनें अनायास रख दिया था हाथ; और फिर क्षण भर के लिये प्रकम्पित हो गया था सम्पूर्ण कायनात, परि...
29 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 16 जून 2011

लाईन सीधी हो गई ...

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वह लाईन के कुछ हिस्से को मिटाता और फिर उसे सीधी करने का प्रयास करता. बारम्बार कोशिशों के बावजूद वह सफल नहीं हो पाया. हाँ ! इस प्रयास में ल...
8 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 9 जून 2011

हमके तू बतावा ... (भोजपुरी)

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देसवा क हमरे समाचार हो हमके तू बतावा फागुन क ठंडी बयार हो हमके तू बतावा . कउने खेतवा में चना बोआयल कइसे बगइचा से लकड़ी ढोआयल केतना भयल...
6 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 1 जून 2011

उस ख़त को पढ़ लेने के बाद ....

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जेठ की दुपहरी में आंचल लहराकर तुमने एक छत लिखा है ; मिल गया आज मेरे नाम जो तुमने ख़त लिखा है , एहसासों के मुँह पर उंगली रख...
17 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 27 अप्रैल 2011

पहचान – The identity

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खुद की पहचान के लिये उनसे पहचान बनाते-बनाते मैनें उन्हें पहचान लिया, और फिर - पहचान बनते-बनते रह गई. .. कई बार उन्होनें पुरजोर कोशिश...
20 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 11 अप्रैल 2011

सबसे सुरक्षित स्थान ... (लघुकथा)

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पूरा महकमा हलकान था। शहर में चोरों का तांडव था और हवा में एक अजीब-सी घुटन घुलती जा रही थी। सरकार ने सख्त फरमान जारी किया—“किसी भी कीमत पर आम...
12 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 23 मार्च 2011

उद्घाटन ... (लघुकथा)

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अभी भवन निर्माण का कार्य सम्पन्न भी नहीं हुआ था पर मंत्रालय से सूचना आ गयी कि कल मंत्री जी भवन का उद्घाटन करने वाले हैं. सारा का सारा महकम...
12 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 10 जनवरी 2011

ठूँठ .... (लघुकथा)

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वह अधमरा सा था. उठ भी तो नहीं सकता था. पेड़ की टहनियों को देखा नहीं गया, वे झुककर उसे हवा करने लगीं. उसे श्वास लेने में परेशानी महसूस हो र...
11 टिप्‍पणियां:
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M VERMA
वाराणसी में पला-बढ़ा, दिल्ली में अध्यापन कार्य में संलग्न था। जब कभी मैं दिल के गहराई में कुछ महसूस करता हूँ तो उसे कविता के रूप में पिरो देता हूँ। अभिनय भी मेरा शौक है।
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