बादलों से हुई
खामोश गुफ्तगू को
एक लहर ने सुना
मन ही मन
कुछ गुना
और यह बात
शहर से कहने को चुना
वह था बेहद भावविभोर
तभी तो
करता हुआ शोर
भागा किनारे की ओर
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सागर को हुआ संकोच
कहीं बात आम न हो जाए
वह बिना बात के
बदनाम न हो जाए
उसने, उसे
रोकने का फैसला किया
देखो -
सैकडो दूसरी लहरों को
उसे वापस लाने के लिए
उसके पीछे दौड़ा दिया

waah waah
जवाब देंहटाएंkya baat hai !
क्या बात है कही बात न लीक हो जाए . भाई आनंद आ गया . बधाई .
जवाब देंहटाएंwaah kya khoob likha hai......bahut badhiya aur gahri soch
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया.
जवाब देंहटाएंअब तो मैं आपकी दसवी फोल्लोवेर बन गई और आपके ब्लॉग पर आती जाती रहूंगी!
जवाब देंहटाएंबहुत खूब! एक से बढकर एक है आपकी कविता!
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति .....बहुत खूब.......!!
जवाब देंहटाएंwahhhh
जवाब देंहटाएंbahut khoob likha aapne, anand aa gaya bas....
सैकडो दूसरी लहरों कोउसे वापस लाने के लिए उसके पीछे दौड़ा दिया