शनिवार, 18 जुलाई 2009

माँ एहसास है --


माँ एक शब्द नहीं
एहसास है
एक अटूट रिश्ता;
एक विश्वास है
कभी देखना गौर से
बच्चे के लिये
स्वेटर बुनते हुए उसे
ऊन को जब वह
तीलियो से उलझाती है
अपने मन की अनगिनत गांठ
खोलती है; सुलझाती है
लोरियां गाती है
सारी रात नहीं सोती है
पर बच्चे की पलकों पर
सपन बोती है
कितना बेफिक्र होता है बच्चा
जब माँ आसपास है
माँ एक शब्द नहीं ---
बच्चा जब संत्रास में होता है
अधबने मकान सा
माँ ढह जाती है
बच्चे के आंसुओं संग
खुद ही बह जाती है
ममतामयी माँ तो
अमलतास है
माँ एक शब्द नहीं
एहसास है
एक अटूट रिश्ता;
एक विश्वास है

.

22 टिप्‍पणियां:

  1. माँ एक शब्द नहीं
    एहसास है
    एक अटूट रिश्ता;
    एक विश्वास है
    बहुत खूबसूरत एहसास सी है यह कविता.
    भावनाओ का सफल प्रवाह
    वाह

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  2. बिल्कुल सही कहा!!

    सुन्दर रचना!!

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  3. ऊन को जब वह
    तीलियो से उलझाती है
    अपने मन की अनगिनत गांठ
    खोलती है; सुलझाती है
    सूक्ष्म अवलोकन -- खूबसूरत अभिव्यक्ति
    बहुत सुन्दर

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  4. प्रवाहपूर्ण सुन्दर रचना ! सच है, माँ एक शब्द नहीं, पूरा संसार है---जीवनदायी जीवंत संसार ! बधाई !

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  5. सत्यवचन। अच्छे भाव। कहते हैं कि-

    माँ फितरत की मौसमें माँ कुदरत के राज
    माँ हर्फों की शायरी माँ साँसों के साज

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  6. मा एक शब्द नही एह्सास है
    एक अटूट रिश्ता
    एक विश्वास है
    बहुत सुन्दर और सत्य है बधाई

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  7. माँ एक शब्द नहीं
    एहसास है
    एक अटूट रिश्ता;



    माँ ढह जाती है
    बच्चे के आंसुओं संग
    खुद ही बह जाती है

    आपकी कविता को शब्दों में कहना मुश्किल है। लाज़वाब!!!!

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  8. बहुत ही सुंदर एहसास के साथ लिखी हुई आपकी ये रचना बहुत अच्छी लगी! माँ के बारे में जितना भी कहा जाए कम है! माँ हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और आज हम उन्ही की वजह से इस दुनिया में कदम रखें हैं!

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  9. माँ............. ये शब्द क्या है....... कितना कुछ है........... shaayad एक कविता में baandhna बहूत ही मुश्किल है........ लाजवाब रचना है apki.......... शुक्रिया

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  10. वर्मा साहब,

    नमन!

    स्वेटर बुनते हुए उसे
    ऊन को जब वह
    तीलियो से उलझाती है
    अपने मन की अनगिनत गांठ
    खोलती है; सुलझाती है
    लोरियां गाती है
    सारी रात नहीं सोती है
    पर बच्चे की पलकों पर
    सपन बोती है

    बहुत ही अच्छी पंक्तियाँ हैं। वैसे माँ को शब्दों में तो नही बांधा जा सकता महसूस किया जा सकता है।

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

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  11. माँ एक शब्द नहीं
    एहसास है
    एक अटूट रिश्ता;
    एक विश्वास है

    बहुत ही सही लिखा है..
    'माँ ' बेशक एक बेहद खूबसूरत अहसास है.उसकी महिमा काजितना भी गुण गान किया जाये कम है.

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  12. "Maa"
    sach kaha...khud me sampurna hai ye shabd...jaise puri dunia yahi se hai aur puri dunia yahi tak hai.

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  13. verma ji adbhut ehsaas hai Maa. Bahut sahi kaha aape. Maa ki jagah to koi bhi nahin le saktaa!!!

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  14. सचमुच में बहुत ही प्रभावशाली लेखन है... वाह…!!! वाकई आपने बहुत अच्छा लिखा है। बहुत सुन्दरता पूर्ण ढंग से भावनाओं का सजीव चित्रण... आशा है आपकी कलम इसी तरह चलती रहेगी और हमें अच्छी -अच्छी रचनाएं पढ़ने को मिलेंगे, बधाई स्वीकारें।

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  15. माँ अहसास है, सच है लेकिन पुत्र विश्‍वास बने तब हो इस दुनिया का कायाकल्‍प।

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  16. माँ हकीकत में ऐसी ही होती है

    मेरे चेहरे पे जब भी फिक्र के साए उतरते हैं
    मेरी माँ अपने हाथों से निवाला छोड देती हैं

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  17. bahut sundar likha aapne..
    maa sach me ek sukhad aur kabhi na bhulane wali ehsaan hai..
    main naman karata hoon maan ko..

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  18. माँ उत्थान है विकाश है ,,
    परिवर्तन है जीवन जीने की आश है ,,
    माँ जीवन के तपते पथ पर ,,,
    जंगल -ए-बुराश है ,,,
    माँ की महिमा अवर्णीय है ,,
    हम तुच्छ कण और माँ आकाश है ,,,
    बहुत बेहतरीन प्रस्तुती मित्र मान के ऊपर लिखी गयी इस अद्भुद रचना के लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करे
    सादर
    प्रवीण पथिक
    9971969084

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  19. लाजवाब रचना.....
    माँ के एह्सास को बहुत खूबसूरती से शब्दो मे पिरोया है. दुनिया के सबसे खूबसूरत रिश्ते को आपने रचना के माध्यम से बखूबी अभिव्यक्त किया है.

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