शनिवार, 30 अक्टूबर 2010

‘यशस्वी भव’ ‘विजयी भव’ ~~


जा रहा था
उसका बेटा ‘समर’ में
पहनकर सेना की
वरदी
नयनों में सागर समेटे
उसकी माँ
‘यशस्वी भव’
और ‘विजयी भव’ का
वर दी
 *****
प्रसंग चल रहा था
सुग्रीव और
बालि का
तन्मय होकर
देख रही थी
बालिका

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