चलो मान लिया
कि तुम नहीं
दृष्टिहीन हो,
पर फायदा क्या
जब तुम्हारे अंदर
दृष्टि ही न हो
*************
बिछा रखा था
जिसके लिये
हर राह में आईना
आस टूटने लगी है
अब तक तो वो
आई ना
***************
ओ री सखी !
अब तो शुरू कर दे
सजना
आ ही रहे होंगे
तुम्हारे
सजना
कि तुम नहीं
दृष्टिहीन हो,
पर फायदा क्या
जब तुम्हारे अंदर
दृष्टि ही न हो
*************
बिछा रखा था
जिसके लिये
हर राह में आईना
आस टूटने लगी है
अब तक तो वो
आई ना
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ओ री सखी !
अब तो शुरू कर दे
सजना
आ ही रहे होंगे
तुम्हारे
सजना
बहुत समय बाद आपने शब्दों का चमत्कार प्रस्तुति किया ... बहुत सुंदर तीनों क्षणिकाएं
जवाब देंहटाएंआईना, दृष्टि और सजना
जवाब देंहटाएंतीनो शब्दों को
पहना दिया आपने
अमोल अर्थों का
सुंदर गहना।
वाह!
क्या कहना!!
बेहद सुन्दर रचनायें।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर क्षणिकाएं...
जवाब देंहटाएंबहुत ख़ूबसूरत रचनायें....
जवाब देंहटाएंये आई ना और अईना का प्रयोग बड़ा खूबसूरत है।
जवाब देंहटाएंare waah
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