आईनों के चेहरे
पीले हो गए
जब से पत्थर इतने
रंगीले हो गए
.
आईना
टूटकर बिखर जाता है
जब भी खुद को
आईने के सामने पाता है
.
आईना
उनकी आँखों के ‘आईने’ में
खुद को निहारता है,
वे संवरने आयें
इससे पहले ही
खुद को संवारता है
पीले हो गए
जब से पत्थर इतने
रंगीले हो गए
.
आईना
टूटकर बिखर जाता है
जब भी खुद को
आईने के सामने पाता है
.
आईना
उनकी आँखों के ‘आईने’ में
खुद को निहारता है,
वे संवरने आयें
इससे पहले ही
खुद को संवारता है
वाह !
जवाब देंहटाएंआईने पर यह प्रयोग बढ़िया लगा ।
वाह,वाह!!
जवाब देंहटाएंवाह बहुत बढ़िया....
जवाब देंहटाएंतीनों टुकडे प्रभावी लगे वर्मा जी । बहुत ही खूबसूरत और बहुत ही उम्दा । आईने पर खूबसूरत बातें
जवाब देंहटाएंbahut khoob
जवाब देंहटाएंवाह!
जवाब देंहटाएंशुभकामनाएं |
जवाब देंहटाएंसर जी -
बेहतरीन रचना ||
आईनों के चेहरे
जवाब देंहटाएंपीले हो गए
जब से पत्थर इतने
रंगीले हो गए
आइना एक निहारने वाले अनेक ,सूरत सके न कोई देख .बहुत बढ़िया बिम्ब हैं आईने के देखने वालों को दिखलाई देने वालों को -
हर आदमी में होतें हैं दस बीस आदमी ,
जिसको भी देखना कई बार देखना .
li.बधाई स्वीकार करें .कृपया यहाँ भी पधारें -
शनिवार, 12 मई 2012
क्यों और कैसे हो जाता है कोई ट्रांस -जेंडर ?
क्यों और कैसे हो जाता है कोई ट्रांस -जेंडर ?
http://veerubhai1947.blogspot.in/
गहन अभिव्यक्ति ... आईना सा दिखाती
जवाब देंहटाएं.
जवाब देंहटाएंवाह जी वाह !
आईने को प्रतीक बना कर अच्छी क्षणिकाएं लिखी हैं …
बधाई !
आपकी इस उत्कृष्ठ प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार १५ /५/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की गई है |
जवाब देंहटाएंwaah||||
जवाब देंहटाएंbahut sundar:-)
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंaaina beshak saja sanwara...per wo aayee naa..bahu hee tarah se aaine ka pryaog kiya hai ..sadar badhayee aaur amantran ke sath
जवाब देंहटाएंआईना
जवाब देंहटाएंउनकी आँखों के ‘आईने’ में
खुद को निहारता है,
वे संवरने आयें
इससे पहले ही
खुद को संवारता है
....लाज़वाब अहसास ! बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...
aaine par achhe bandh likhe hai
जवाब देंहटाएंshubhkamnayen
सुन्दर रचना।
जवाब देंहटाएंtop class post, thanks for sharing
जवाब देंहटाएंZee Talwara
Zee Talwara
Zee Talwara
Zee Talwara
Zee Talwara
Zee Talwara
Zee Talwara
Zee Talwara
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