मंगलवार, 26 जून 2012

पत्थरों के गाँव में ठहरने लगा है आईना …..


तेरी गली से होकर गुजरने लगा है आईना
तेरी हर आहट पर संवरने लगा है आईना
.
लटें संवार कर तुम चली गयी पल भर में
जाने क्या सोचकर उछलने लगा है आईना
.
जाने कब, कहाँ, किस राह से तुम गुजरो
हर राह में बेसब्र बिखरने लगा है आईना
.
उकेरता नहीं किसी और का प्रतिबिम्ब यह
रात ढलते ही देखिये कहरने लगा है आईना
.
अक्सर इसका वजूद अनगिनत हो जाता है
नजरों के आईने में उतरने लगा है आईना
.
डालती ही क्यूं हो इसपर सवालिया निगाह
टूट जाएगा इसकदर मचलने लगा है आईना
.
बेपनाह मुहब्बत का सबूत और क्या होगा
पत्थरों के गाँव में ठहरने लगा है आईना

31 टिप्‍पणियां:

  1. अक्सर इसका वजूद अनगिनत हो जाता है

    नजरों के आईने में उतरने लगा है आईना

    .बहुत बढ़िया ... आभार

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  2. बेपनाह मुहब्बत का सबूत और क्या होगा

    पत्थरों के गाँव में ठहरने लगा है आईना

    काफी रिस्क उठा रहा है ये मजनू तो :) मगर क्या करे वो कहते हैं कि प्यार अँधा होता है उसे रिस्क-विस्क नजर नहीं आता :) बहुत सुन्दर प्रस्तुति !

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  3. बहुत खूब ... बेहतरीन प्रस्‍तुति

    कल 27/06/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    ''आज कुछ बातें कर लें''

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  4. बेपनाह मुहब्बत का सबूत और क्या होगा

    पत्थरों के गाँव में ठहरने लगा है आईना

    शानदार गज़ल

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  5. behtareen Gazal....Pathar k gaon me thahrne laga haiaaina.Badhai. Ek Sher Mulahiza karen 'yunhi nahi banaya sheeshe ka usne ghar,girvi shahar k patthar pahle liye the kar.'

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  6. क्सर इसका वजूद अनगिनत हो जाता है
    नजरों के आईने में उतरने लगा है आईना
    बहुत बढ़िया गज़ल...

    जवाब देंहटाएं
  7. उकेरता नहीं किसी और का प्रतिबिम्ब यह

    रात ढलते ही देखिये कहरने लगा है आईना...बहुत बढ़िया ...

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  8. डालती ही क्यूं हो इसपर सवालिया निगाह

    टूट जाएगा इसकदर मचलने लगा है आईना ...

    waah...Beautiful...

    .

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  9. लटें संवार कर तुम चली गयी पल भर में

    जाने क्या सोचकर उछलने लगा है आईना

    डालती ही क्यूं हो इसपर सवालिया निगाह

    टूट जाएगा इसकदर मचलने लगा है आईना ...

    शानदार गज़ल

    जवाब देंहटाएं
  10. बेहद सुंदर रचना....
    बधाई वर्मा जी !

    जवाब देंहटाएं
  11. बेहद सुंदर रचना....
    बधाई वर्मा जी !

    जवाब देंहटाएं
  12. बेपनाह मुहब्बत का सबूत और क्या होगा,पत्थरों के गांव में ठहरनें लगा है आइना...बहुत ही खूबसूरती से पिरोया गया है शब्दों को..बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ।

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  13. सभी शेर बहुत बढ़िया, ये ज्यादा ख़ास लगे...

    उकेरता नहीं किसी और का प्रतिबिम्ब यह
    रात ढलते ही देखिये कहरने लगा है आईना

    बेपनाह मुहब्बत का सबूत और क्या होगा
    पत्थरों के गांव में ठहरनें लगा है आइना

    दाद स्वीकारें.

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  14. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतिकरण,आभार है आपका

    आज की मेरी नई रचना जो आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है


    ये कैसी मोहब्बत है

    जवाब देंहटाएं
  15. उकेरता नहीं किसी और का प्रतिबिम्ब यह

    रात ढलते ही देखिये कहरने लगा है आईना

    बेहतरीन व खुबसूरत गजल

    साभार !

    जवाब देंहटाएं
  16. बहुत खुबसूरत ग़ज़ल ...........आभार
    दीपावली की शुभकामनाएँ

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  17. बेपनाह मुहब्बत का सबूत और क्या होगा
    पत्थरों के गाँव में ठहरने लगा है आईना

    जवाब देंहटाएं
  18. बेपनाह मुहब्बत का सबूत और क्या होगा

    पत्थरों के गाँव में ठहरने लगा है आईना
    बहुत ही लाजवाब.....
    वाह!!!!

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  19. तेरी गली से होकर गुजरने लगा है आईना
    तेरी हर आहट पर संवरने लगा है आईना....
    हर शेर लाजवाब और दमदार है। बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीय ।

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  20. The information you have produced is so good and helpful, I will visit your website regularly.

    जवाब देंहटाएं
  21. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर शनिवार 13 जून 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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