तुम्हारी सोहबत का ही असर था,
कि मैं लड़खड़ा रहा था।
मेरी इसी लड़खड़ाहट को देखकर
ट्रैफिक पुलिस ने मुझे रोक लिया।
मुँह से लगाया ब्रेथलाइज़र,
वह हैरान था—
अल्कोहल का स्तर
शून्य था।
मैं मुस्कुरा दिया...
नशे में तो था मैं,
मगर उस नशे में
जो किसी मशीन की ज़द में नहीं आता।
उसे नशा मत कहिए साहिब,
अहले-दिल जानते हैं—
उसे तो सुरूर कहते हैं।

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में 11 जुलाई, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंThanks 😊
हटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंThanks 😊
हटाएंजी हाँ, उसे सुरूर ही कहते हैं
जवाब देंहटाएं😃
हटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंशुक्रिया
हटाएंबहुत सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंशुक्रिया
हटाएंWahh!
जवाब देंहटाएंThanks 😊
हटाएंवह क्या बात है ... उनका सुरूर क्या कहने ....
जवाब देंहटाएंशुक्रिया
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