मैंने जब
स्पर्श और
आलिंगन के
सूक्ष्म आवेगों को
चित्रित किया,
तो देह से
देह तक
एक अनकही
कविता उतरने लगी।
यह कविता
किसी संकलन में
प्रकाशित नहीं हो सकती,
क्योंकि इसे
किसी पाठक की
ज़रूरत नहीं।
पाठक की तलाश में
रची गई रचना
मोहताज हो जाती है
काव्य-तत्वों और शिल्प की।
चलो, लिखें
छुवन की कलम से
एक स्वच्छंद कविता,
जिसके लेखक और पाठक
सिर्फ हम दोनों हों।
और फिर
उसे साँसों में घोलकर
जी लें इस तरह,
कि वह
अधूरी भी रहे
और मुकम्मल भी।

Wah!!
जवाब देंहटाएंThanks
हटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंबेहद रूमानी, भावपूर्ण अभिव्यक्ति सर।
जवाब देंहटाएंसादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार ३ नवंबर २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
शुक्रिया
हटाएंबहुत अच्छी और एकदम सच्ची बात कही है आपने
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंछुअन के क़लम से,वाह
जवाब देंहटाएंअच्छी अभिव्यक्ति।
जवाब देंहटाएंआपके ब्लॉग को फॉलो कर लिया है कृपया आप भी स्नेह प्रदान करें