गुरुवार, 18 जून 2009

सारी दास्ताँ बयाँ कर गयीं ----


मैं

तुम

मदहोश

फिर भी

खामोश;

गुमसुम

मगर ये

चुगलखोर तुम्हारी

वाचाल कुमकुम

ये क्या कर गयीं

सारी दास्तान

बयाँ कर गयी --

6 comments:

श्यामल सुमन ने कहा…

कुमकुम खमोशी की आवाज बन गयी। बहुत खूब वर्मा जी।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

ओम आर्य ने कहा…

ऐसी भावनाये की बिना बहे नही रहा जा सकता.......बहुत सुन्दर वर्मा जी

नीरज कुमार ने कहा…

varma sahab,
chhoti-si, adhuri-si puri kavita, kya kahne wah-wah!!!
Sadar

VaRtIkA ने कहा…

अरे चुगलखोर कुमकुम तुम ये क्या कर गयी... कैसे एक नज़्म की वजह बन गयी.... :)

Razia ने कहा…

Wah -- Wah kya kahne

अल्पना वर्मा ने कहा…

bahut hi thode se shbdon mein aap ne ek poori kavita kya kahen kahani hi kah di hai..
bahut khuub!

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