मंगलवार, 23 जून 2009

तुम पुनर्नवा हो क्या -----?


तुम
आसपास कहीं नहीं पर
तुम्हारे ख़याल की आहट से
सरगोशियां होती हैं
शाख-ए-वज़ूद को मेरे
तुम हिला देती हो
कुछ अधमरे एहसासों को
तुम जिला देती हो
तुम हवा हो क्या-----?

तुम
ज़ुबान से दिलासा नहीं देती
नज़र की छुवन से ही
सकूं दे जाती हो
और मैं सो जाता हूं
सपन की आहटों के बीच
तुम नज़र आती हो जब
शोख़ लटकी-लटों के बीच
तुम दवा हो क्या -----?


तुम
जिस दर्द के पास से गुजरी
वो दर्द फिर दर्द न रहा
पत्थर था मैं पर
पानी सा बहा
नब्ज छूकर नहीं देखी
बयां कर दी हाले-दिल मेरा
तुम पुनर्नवा हो क्या -----?

17 comments:

Usha gaur ने कहा…

भाव बहुत सुंदर हैं. अच्छा लगा. बधाई

Razia ने कहा…

तुम
जिस दर्द के पास से गुजरी
वो दर्द फिर दर्द न रहा
====
सुंदर रचना. शानदार अभिव्यक्ति. बहुत खूब

ओम आर्य ने कहा…

wah sabkuchh hai kyoki wah pyar hai ......ruho ki chhuwan hai...........is janam se us janma ki saathee hai .......aatmaa ki pyaas hai......tabhi to wah punranawa hai ............jo har ek chij ko naya kar deti hai ..........waaaaaaaaaaaaaaaaaaaah

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

वाह! पुनर्नवा का खूब उपयोग किया है।
मुझे तो मेरे वैद्य मामाजी याद आ गए। जो पुनर्नवा का खूब इस्तेमाल करते थे।

Udan Tashtari ने कहा…

शानदार रचना-पसंद आई.

Babli ने कहा…

आपकी प्यारी टिपण्णी के लिए शुक्रिया! आप ही की दुआ की वजह से मैं पेंटिंग और शायरी दोनों बेहतर करने की कोशिश करती हूँ! मैंने एक नया ब्लॉग बनाया है देखकर बताइएगा कैसा लगा! मेरे दोस्त ने कहा की उस ब्लॉग पर कमेन्ट नहीं कर पा रहा है तो आपसे गुजारिश है की इस ब्लॉग पर कमेन्ट करके देखिये ताकि मुझे पता चले आखिर कमेन्ट दे पा रहे है या नहीं!
http://amazing-shot.blogspot.com
बहुत ही सुंदर भाव के साथ आपकी ये शानदार रचना मुझे बेहद पसंद आया!

M VERMA ने कहा…

Thanks a lot for nice comments.

cartoonist anurag ने कहा…

har bar ki tarah phir ek shandar rachna.........

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

bahut sundar..!

रंजना ने कहा…

कोमल भावों को अद्वितीय अभिव्यक्ति दी है आपने....मन को छूती बहुत ही सुन्दर रचना....

नीरज गोस्वामी ने कहा…

अद्भुत रचना है आपकी...शब्द और भावः का बहुत ही खूबसूरत मिश्रण...वाह...मेरी बधाई स्वीकार करें...
नीरज

नीरज कुमार ने कहा…

अच्छी है...बहुत अच्छी है...कभी कभी आता हूँ तो मोहित हो जाता हूँ...इसी तरह हिंदी को अपना योगदान देते रहें...

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत ही सुन्दर भाव लगे आपकी इस रचना के शुक्रिया

शोभा ने कहा…

वाह! पहली बार आई आपके ब्लाग पर। आप बहुत अच्छा लिखते हैं। पढ़कर बहुत अच्छा लगा। बधाइ स्वीकारें।

Nirmla Kapila ने कहा…

तुम आस पास कहीं नहीं
पर तुम्हारी आहट
ये आहट जब सुनयी देने लगे तभी तो कविता बनती है
और जिस दर्द के पास से गुज़री
वो दर्द फिर ना रहा
वाह वाह ये मेरे दिल के क्रीब जितनी कवितायें हैन उन मे शामिल हो गयी है अद्भुत आभार्

Reetika ने कहा…

nazar ki chhuan se hi, sukoon de jaati ho aur main so jata hoon, sapno ki aahtaon ke beech....
behad samvedansheel bhaav!

Reetika ने कहा…
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