गुरुवार, 23 जुलाई 2026

हार की जीत

हर तकरार में
तुमसे हार जाता हूँ,
और तुम हर बार
पूरे कमरे में
जीत की मुस्कान लिए फिरती हो।

तुम्हें कभी जाहिर नहीं होने दूँगा
कि तुम्हारी वह मुस्कान
दरअसल
हर बार
मेरी ही जीत होती है।

12 टिप्‍पणियां:

Sweta sinha ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति।
भावनाओं का प्रवाह और अभिव्यक्ति
आज के संवेदनहीनता के दौर में सुखद एहसास देते हैं सर।
सादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार २५ जुलाई २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।

Digvijay Agrawal ने कहा…

हर बार बाजी आपकी
साधुवाद
वंदन

M VERMA ने कहा…

जी शुक्रिया

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह

Anita ने कहा…

दिल को बहलाने को ग़ालिब ख़्याल अच्छा है

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया 😃

M VERMA ने कहा…

ये खयाल नहीं हकीकत है
😃

Onkar ने कहा…

सुंदर रचना

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

Aman Peace ने कहा…

Waah!

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊