प्रवाह
निरावेशन की शून्यता मुझे मंजूर नहीं है ....
मंगलवार, 2 जून 2009
बेरौनक मिली अधजली पगली!! -- शब्द चित्र
शादी की रात से पहले
गली
खुश थी
इतनी
कि
संज-संवर कर
गली-गली घूमने
निकल पड़ी गली
-------------
शादी की रात के बाद
सड़ांध भरी गली
मुख्य सड़क से पनाह मांगती
बेरौनक मिली
अधजली
पगली
2 टिप्पणियां:
vandana gupta
3 जून 2009 को 8:51 pm बजे
bahut badhiya rachna
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M VERMA
5 जून 2009 को 4:20 pm बजे
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bahut badhiya rachna
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