रविवार, 21 जून 2009

उस ख़त को पढ़ लेने के बाद ----


जेठ की दोपहरी में

आँचल को लहराकर

एक छत लिखा है

मिल गया आज

मेरे नाम तुमने जो

ख़त लिखा है

एहसासों के मुँह पर उंगली रख

बोलने से मना कर दिया मैंने

उस ख़त को डायरी में रख

खोलने से मना कर दिया मैंने

मुझे पता है,

उस लिफाफे में महज़ एक

कोरा कागज़ ही होगा

अल्फाज़ कब छोडे हैं

मैंने तुम्हारे पास

कि तुम ख़त लिख सको

वे तो पहले ही चले आए हैं

बादल बेवज़ह तो नही छाये हैं

इस ख़त को तो मैंने

उसी दिन पढ़ लिया था

जब गुमसुम; खामोश तुम

नज़रों से बोल रही थी

फिजा में मिश्री की डली

अनजाने में घोल रही थी

.

नहीं-नहीं ---

नहीं पढ़ पाऊँगा

मैं दूसरा ख़त कोई

उस ख़त को पढ़ लेने के बाद

बेशक,

तुम्हारा ही लिखा क्यों न हो --- ! !

18 टिप्‍पणियां:

  1. वाह जी वाह

    पहले पहल का अहसास ही अलग होता है.

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  2. khamoshiya bahut kuchh bayaan kar deti hai ........bahut sundar ....

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  3. khamoshiya bahut kuchh bayaan kar deti hai ........bahut sundar ....

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  4. वाह क्या लिखा है, कि शब्द छोड़े ही नहीं है।

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  5. बहुत खूबसूरत अहसास...

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  6. वाह कितना लाजवाब लिखा है............... ख़त मैं न होते शब्दों को भी शब्द बना कर प्रभावी रचना लिखी है...........

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  7. क्या कहूँ बहुत दिल की गहराईयों से लिखा है
    अल्फाज़ कब छोडे हैं
    मैने तुम्हारे पास
    कि तुम खत लिख सको
    वह वह बहुत सही कहा मेरे पास भी अल्फाज कहाँ बछे हैं कि मै इस कविता की शान मे कुछ कह सकूँ
    लाजवाब बधाई

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  8. khat ka majmoon bhaamp lete hain lifafa dekhkar. wah. verma ji badhai rachna.

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  9. दिल को छू रही है कविता.

    अल्फाज़ कब छोडे हैं
    मैने तुम्हारे पास
    कि तुम खत लिख सको

    एहसास इतने मुखरित कि विश्वास अनुत्तरित

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  10. दिल की गहराई में संचित हैं
    वह अपना कोष खंगालूँ
    और आज मैं सोच रहा हूँ
    वह अनलिखा पत्र लिख डलूँ.

    वर्तनी अवश्य देखें

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  11. जेठ की दोपहरी में आँचल को लहराकरएक छत लिखा है
    मिल गया आज मेरे नाम तुमने जोख़त लिखा है !
    behterin...
    tere khusbbo je mehke khat jalata kaise?

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  12. वाह बहुत लाजवाब !!!!!! ख़त मैं आपके अहसास जैसा सा आनंद हो न हो !पर वर्माजी थोड़े दिनों बाद ही सही पढ़ तो लेना.........ख़त भाई, मैं अपनी टिपण्णी की बात नहीं कर रहा !!! क्या करूँ मजाक करने की लत है !!!

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  13. jabardast......jitna kaha jaye utna kam hai....
    shabdon ko naya roop mila is naye anuthe ehsaas se......

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  14. वाह लाजवाब रचना लिखा है आपने! बहुत ही सुंदर एहसास से लिखी गई आपकी ये उम्दा रचना को पड़कर मैं निशब्द हो गई!

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  15. वाह बहुत खूब............आपने तो हमारे पास अल्फाज़ नही छोड़े आपकी रचना की तारीफ करने के लिये...........अत्यंत सुन्दर रचना

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