शुक्रवार, 18 जून 2010

मुद्दतों से न आँख लगी ~ ~

आँसू न हो

किसी किसान की आँख में

अबकी बरस,

बादल हर खेत में जाकर

झूमकर तूँ

अब तो बरस.


.

जब से तुमसे

आँख लगी,

अर्सा हो गया सोये हुए

रात आँखों में कटी

मुद्दतों से न

आँख लगी.

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर शब्दों की बाजीगरी और सुन्दर भाव

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  2. बरस और आँख लगी....दोनों शब्दों में गज़ब का चमत्कार किया है...सुन्दर प्रस्तुति

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  3. विरोधाभ्हासी अर्थो से बनी सुंदर क्षणिका !

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  4. पहली कविता में की गयी प्रार्थना स्वीकार हो..ईश्वर करे किसी किसान की आँख में अब के बरस न आंसू हों...दूसरी रचना प्रेम के अधीन मन की स्थित बता रही है.

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