गुरुवार, 23 जुलाई 2026

हार की जीत

हर तकरार में
यूँ तो तुमसे हार जाता हूँ,
और तुम हर बार
पूरे कमरे में
जीत की मुस्कान लिए फिरती हो।

 

तुम्हें कभी यह जाहिर नहीं होने दूँगा
कि तुम्हारी वह मुस्कान
हर बार
मेरी ही जीत होती है।

10 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर अभिव्यक्ति।
    भावनाओं का प्रवाह और अभिव्यक्ति
    आज के संवेदनहीनता के दौर में सुखद एहसास देते हैं सर।
    सादर।
    -------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २५ जुलाई २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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  2. हर बार बाजी आपकी
    साधुवाद
    वंदन

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  3. दिल को बहलाने को ग़ालिब ख़्याल अच्छा है

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