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निरावेशन की शून्यता मुझे मंजूर नहीं है ....
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सोमवार, 31 मई 2010
'पीना और जीना'
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वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में मेरी व्यंग्य रचना 'पीना और जीना' पढने के लिये क्लिक करें पीना और जीना
3 टिप्पणियां:
गुरुवार, 27 मई 2010
आधा तुम्हारे लिये और आधा मेरे लिये, बाकी बचे सो ... (लघुकथा)
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उसने अपनी प्रजा से कहा जाओ और मेहनत करो, खेतों में रोटियाँ उगाओ. हम तुम्हें खुशहाल देखना चाहते है. उसके कारिन्दे उन्हें शर्ते बताने लगे : ...
13 टिप्पणियां:
बुधवार, 19 मई 2010
'कुत्तों पर रिसर्च' ~~
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वैशाखानन्द प्रतियोगिता में मेरी रचना 'कुत्तों पर रिसर्च' पढ़ने के लिये क्लिक करें : वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में : श्री...
3 टिप्पणियां:
मंगलवार, 30 जून 2009
चार दुधमुहे बच्चे मरे हैं ---
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ये आग जो लगी है जल्दी काबू कर ली जाती पर क्या करें सभी कर्मचारी अभी तक तो पिछली लगी आग को ही बुझा रहे हैं वे तो बहुत मसरूफ हैं आग फ़िर न लगे ...
8 टिप्पणियां:
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