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निरावेशन की शून्यता मुझे मंजूर नहीं है ....
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बुधवार, 1 जून 2011
उस ख़त को पढ़ लेने के बाद ....
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जेठ की दुपहरी में आंचल लहराकर तुमने एक छत लिखा है ; मिल गया आज मेरे नाम जो तुमने ख़त लिखा है , एहसासों के मुँह पर उंगली रख...
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