रविवार, 14 जून 2009

अगली बार जब तुम मुझसे मिलना - -


अगली बार
जब तुम मुझसे मिलना
तन नहीं
तुम अंतर्मन हो जाना
तेरा एहसास
बन जाए मेरी साँस
इतनी तुम सघन हो जाना
अगली बार
जब तुम मुझसे मिलना
मुझे पहचानना मत
मत करना कोई वायदा
मत छूना मुझे छुवन से
गुजरने देना मुझे
अनजानी चुभन से
अगली बार
जब मुझसे मिलना
तुम अगन हो जाना
परिंदों सा
मैं जलना चाहता हूँ
तुम्हारी सपन पलकों पर रख
कुछ कदम चलना चाहता हूँ
या शायद
लड़खड़ाते कदमों के बल
मैं संभलना चाहता हूँ

अगली बार
जब तुम मुझसे मिलना ---

18 टिप्‍पणियां:

ritu raj ने कहा…

dil ki baat hai, dil se achchi lagi. Likhte rahe.

Publisher ने कहा…

सरस्वती की कृपा है सर आप पर। लिखते रहिए और हमें पढऩे का मौका देते रहिए।

वर्तिका ने कहा…

"तेरा एहसास
बन जाए मेरी साँस
तुम इतनी
सघन हो जाना"

बहुत प्यारे से एहसासों से भरी सुंदर कृति... :)

आभार

Himanshu Pandey ने कहा…

काफी महसूसियत से लिखी गयी कविता । अभिव्यक्ति खूबसूरत है । धन्यवाद ।

Bhuwan ने कहा…

तेरा एहसास बन जाये मेरी साँस
इतनी तुम सघन हो जाना अगली बार...

बेहतरीन

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत गजब!!

Urmi ने कहा…

पहले तो मैं आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ आपकी सुंदर टिपण्णी के लिए!
मैं पेंटिंग करती हूँ इसलिए शायरी के साथ साथ अपनी बनाई हुई पेंटिंग देती हूँ ताकि और बेहतर लगे!
मुझे इसका मतलब समझ में नहीं आया "कृपया उचित समझे तो कमेंट के लिये फुल पेज़ का आप्शन चुने."
बहुत ख़ूबसूरत कविता लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है!

vandana gupta ने कहा…

behtreen jazbaat......shuru ki lines hi itni shandar hain ki milan ki chah ko poori tarah bayan kar jati hain aur wo bhi us milan ki jahan do na rahein ek ho jayein........ek doosre ke jazbaaton ko bina kahe jaan jaye.......kya khoob likha hai.

बेनामी ने कहा…

Hi!
U really had a great talent.

Keep writing the same.

Best Wishes!
http://ultimatechange.wordpress.com/

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

अगली बार
जब तुम मुझसे मिलना
तन नहीं
तुम अंतर्मन हो जाना
तेरा एहसास
बन जाए मेरी साँस
इतनी तुम सघन हो जाना
अगली बार
जब तुम मुझसे मिलना
मुझे पहचानना मत
मत करना कोई वायदा
मत छूना मुझे छुवन से
गुजरने देना मुझे
अनजानी चुभन से

पूरी की पूरी कविता लाजवाब......!!
बहुत सुन्दर ....वाह......!!

shama ने कहा…

Mere "kahanee" blogpe tippneeke liye bohot,bohot dhanyawad!

Aapki uprokt rachna mujhe nishabd kar gayee...! Aise ehsaas kiseeke naseeb hon,to wo sirf khush naseeb nahee...usse kaheen badhke...!

बेनामी ने कहा…

varma ji aap ki sabhi kavitai pdhi achchi lagi lagta hai aap har tarh ki kavita likh sakta hai

बेनामी ने कहा…

very good

बेनामी ने कहा…

kya kavita likthe hai aap

बेनामी ने कहा…

aapjitney sundar hai utjni sundar aapki kavita liktien hain mujhe toh lagta hai aap bhaoot achchai teacher bhi hoonge

बेनामी ने कहा…

agli baar jab tum mujhse milna kavita pasand aai

shobha kathait

Unknown ने कहा…

agli baar jab tum mujhse milna kavita pasand aai

shobha kathait

बेनामी ने कहा…
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