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गुरुवार, 24 सितंबर 2009

रावण फ़िर अस्तित्व ले रहा है ~~~


रावण अस्तित्व ले रहा है
हर रामलीला ग्राऊँड के बाहर
न जाने कितने कारीगर लगाये गये हैं
पिछले साल से बड़ा रावण बनाने के लिये
कोई इसका हाथ बना रहा है
कोई धड़, कोई सिर तो कोई पैर
कोई इसका जिस्म बना रहा है
कोई इसका तिलिस्म बना रहा है
अभी यह पड़ा रहेगा
पर एक दिन यह खड़ा हो जायेगा
देखते देखते कद में
राम से बड़ा हो जायेगा
तय है कि इस बार भी यह
राम के हाथों मारा जायेगा
फिर इसका दहन होगा
इस तरह परम्परा निर्वहन होगा

हम क्यूँ भूल जाते हैं
रावण के मायावी स्वरूप को
जब राम का तीर चलेगा
वह हमारे बीच ही बैठा देख रहा होगा
हमारे द्वारा ही बनाये
रावण के पुतले के ढहन को
और फिर उसके दहन को

हर बार की तरह इस बार भी
राम का निशाना चूक जायेगा
रावण फिर नही मरेगा
वह वर्षपर्यंत अट्टहास करेगा
और फिर अगले साल फिर ----