शनिवार, 16 मई 2009

सावधान! ग्यारह हज़ार बोल्ट्स ....


बिज़ली के खम्भे को
आलिंगन में लेकर
चोटी की ओर
बढ़ती है लतर
बढ़ते-बढ़ते रूकती है
उस बोर्ड के पास
जिस पर लिखा है –
सावधान! ग्यारह हज़ार बोल्ट्स
यह ठहराव
क्षण भर का ही होता है
और फिर पुनः
अपने ही धुन में
बिजली के खम्भे को
और कसकर –
आलिंगन में लेकर
चोटी की ओर
धीरे-धीरे बढ़ती है लतर
अपने हश्र से बेखबर
ऊपर की ओर
चढ़ती है लतर
मैंने कभी भी
किसी भी लतर को
पीछे मुड़कर नीचे की ओर
झांकते नहीं पाया;
मैंने कभी भी
किसी भी लतर को
अपनी उचाईयां
आंकते नहीं पाया
हर पल; हर क्षण
बिजली के खम्भे को
आलिंगन में लेकर
चोटी की ओर
धीरे-धीरे
बढ़ती है लतर
और फिर एक दिन
जब अपने प्रयास में
सफल होती है
खम्भे से और भी
प्रगाढ़ आलिंगनरत होती है
सहसा –
क्षणांश में ही
पूरी की पूरी
सूख जाती है लतर
फिर भी वह
खम्भे को नहीं छोड़ती है
या शायद
और कसकर जकड़ लेती है
इतना कि
बिज़ली विभाग के लोग भी
उसे आसानी से
अलग नहीं कर पाते हैं
और विवश हो
क्षत-विक्षत कर जाते हैं
चाहत की कोई सीमा नहीं होती
कुछ ही दिनों में
उसी जड़ से
फिर एक कोंपल निकलती है;
पल्लवित होती है
और फिर
बिजली के खम्भे को
आलिंगन में लेकर
चोटी की ओर
धीरे-धीरे
बढ़ती है लतर

3 comments:

gargi gupta ने कहा…

sachchha pram hota hi aisa hai ...sab pata hota hai ki is ka anjam maut hi hoga par fir bhi sari duniya se vekhabar chal padte hai usi rah par jaha kitna current milta hai logo ke tano ka pata hi nahi hota or jis ke liye hum ye sab kar rahe hote hai vo bhi saath hai ya nahi ye bhi pata nahi hota

according to me pyar tab hi sarthak hota hai jab tak kisi se koi ummid na ho ...jara ummid ki or sab apna daman jhatak kar chale jate hai .....or rah jata hai ek sukha murjhaya hua sa maan!!
bhut achchhi rachna aap jo kahna chahte the sayad samaj gai hu main

SWAPN ने कहा…

hamesha ungli pakad kar chalne walom ka hashra. bahut khoob.

M VERMA ने कहा…

thank you for nice comments

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