रविवार, 9 अगस्त 2009

--- सुरूर छाता है ! ! ( रोटी ने तवे से जो कहा मैंने सुना)


*
रोटी ने तवे से कहा
तुम्हारा अस्तित्व तो
बहुत करामाती है
तुम्हारी आँच मुझको तो
बहुत भाती है
तुम्हारे वजूद ने
मुझको सपन दिया है
सच कहूँ तो
एक मीठी सी तपन दिया है
तवा बोला
पर ये आग मेरा नहीं है
मैं तो महज़ वाहक हूँ
तुम्हारे और चूल्हे के बीच
मैं तो नाहक़ हूँ
चीत्कार कर उठी रोटी --
नहीं -- नहीं !!
मुझे चूल्हे की आग से क्या लेना
उसकी आग तो झुलसाती है
मेरे शफ्फाक़ वज़ूद पर
दाग दे जाती है
वाहक कभी नाहक़ नहीं होता
मुझे तो
तुम्हारी ही आग में सिकना भाता है
तुम्हारे अस्तित्व से लिपटकर
एक सुरूर सा छाता है.

--- सुरूर छाता है
*

14 comments:

Razia ने कहा…

वाहक कभी नाहक़ नहीं होता"
वाह! बिलकुल अलग नज़रिया दिया आपने तो रोटी और तवे के संवाद को.
बेहतरीन कविता
सुन्दर भाव
रोटी बनाते समय मै भी इस संवाद को सुनने का प्रयास करूँगी.

Ekta ने कहा…

wow! new view on 'roti and tawa'
very beautiful
lovely

चंदन कुमार झा ने कहा…

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ती......भावपूर्ण रचना. आभार.

रज़िया "राज़" ने कहा…

मुझे तो
तुम्हारी ही आग में सिकना भाता है
तुम्हारे अस्तित्व से लिपटकर
एक सुरूर सा छाता है.
वाह क्या जवाब है। बहेतरीन रचना।

vandana ने कहा…

bahut hi behtreen rachna likhi hai.........aur roti ka jawaab to jaise na jane kitni ankahi baton ko kah gaya hai........waah,bahut badhiya

Prem Farrukhabadi ने कहा…

मुझे तो
तुम्हारी ही आग में सिकना भाता है
तुम्हारे अस्तित्व से लिपटकर
एक सुरूर सा छाता है.

--- सुरूर छाता है
verma ji
lagta hai tava koi aur hai roti koi aur hai choolha koi aur hai. bhavnaon ki pakad aur abhivyakti kabile tareef badhai!

M VERMA ने कहा…

आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद रचना पर अपने विचार रखने के लिये

विवेक सिंह ने कहा…

बीच में एक बार रोटी को पलट देते , जल गयी होगी !

mehek ने कहा…

sach bahut hi alag nazariya peh hua hai roti aur awe ke rishty ka.
वाहक कभी नाहक़ नहीं होता
waah bahut sahi baat bhi keh di.
sunder rachana badhai.

महफूज़ अली ने कहा…

waaqai mein waahak kabhi naahak nahi hota........

behtareen bhaav ke saath ...........bahut hi khoobsoorat kavita.....
roti aur tave ka rishta aaj hi samajh mein aaya.........

ज्योति सिंह ने कहा…

behatrin rachana gaharai ko chhuti hui .

Babli ने कहा…

अत्यन्त सुंदर रचना! एकदम अलग और सबसे जुदा! वाकई में रोटी और तवे पर आपने इतनी खूबसूरती से लिखा है की मैं क्या कहूं! बहुत ही बढ़िया लगा!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वाह ......गज़ब का लिखा है .......... अनोखा प्रयोग है आपकी रचना में ........... भावनाओं का मिश्रण है.......... लाजवाब रचना है..........

अर्शिया अली ने कहा…

Aapki kalpanaa ko salaam kartee hoon.
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