तेरी गली से होकर गुजरने लगा है आईना
तेरी हर आहट पर संवरने लगा है आईना
.
लटें संवार कर तुम चली गयी पल भर में
जाने क्या सोचकर उछलने लगा है आईना
.
जाने कब, कहाँ, किस राह से तुम गुजरो
हर राह में बेसब्र बिखरने लगा है आईना
.
उकेरता नहीं किसी और का प्रतिबिम्ब यह
रात ढलते ही देखिये कहरने लगा है आईना
.
अक्सर इसका वजूद अनगिनत हो जाता है
नजरों के आईने में उतरने लगा है आईना
.
डालती ही क्यूं हो इसपर सवालिया निगाह
टूट जाएगा इसकदर मचलने लगा है आईना
.
बेपनाह मुहब्बत का सबूत और क्या होगा
पत्थरों के गाँव में ठहरने लगा है आईना








25 comments:
अक्सर इसका वजूद अनगिनत हो जाता है
नजरों के आईने में उतरने लगा है आईना
.बहुत बढ़िया ... आभार
बेपनाह मुहब्बत का सबूत और क्या होगा
पत्थरों के गाँव में ठहरने लगा है आईना
काफी रिस्क उठा रहा है ये मजनू तो :) मगर क्या करे वो कहते हैं कि प्यार अँधा होता है उसे रिस्क-विस्क नजर नहीं आता :) बहुत सुन्दर प्रस्तुति !
बहुत खूबसूरत गज़ल
बहुत खूब ... बेहतरीन प्रस्तुति
कल 27/06/2012 को आपकी इस पोस्ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.
आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!
''आज कुछ बातें कर लें''
बेपनाह मुहब्बत का सबूत और क्या होगा
पत्थरों के गाँव में ठहरने लगा है आईना
शानदार गज़ल
behtareen Gazal....Pathar k gaon me thahrne laga haiaaina.Badhai. Ek Sher Mulahiza karen 'yunhi nahi banaya sheeshe ka usne ghar,girvi shahar k patthar pahle liye the kar.'
वाह!
आपकी पोस्ट पर साथी मित्रों की दिलचस्प टिप्पणियों ने आकर्षित किया तो हमने सोचा क्यों न इन्हें सहेज़ कर दूसरे पाठकों को भी पढाया जाए , शायद औरों को भी प्रेरणा मिले , हमने यही किया , कैसे ? आप टिप्पणी पर क्लिक करें और देखें
क्सर इसका वजूद अनगिनत हो जाता है
नजरों के आईने में उतरने लगा है आईना
बहुत बढ़िया गज़ल...
उकेरता नहीं किसी और का प्रतिबिम्ब यह
रात ढलते ही देखिये कहरने लगा है आईना...बहुत बढ़िया ...
.बहुत बढ़िया ... आभार
बहुत सार्थक प्रस्तुति!
बहुत बढ़िया सर!
सादर
डालती ही क्यूं हो इसपर सवालिया निगाह
टूट जाएगा इसकदर मचलने लगा है आईना ...
waah...Beautiful...
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stariya wa sundar rachana
लटें संवार कर तुम चली गयी पल भर में
जाने क्या सोचकर उछलने लगा है आईना
डालती ही क्यूं हो इसपर सवालिया निगाह
टूट जाएगा इसकदर मचलने लगा है आईना ...
शानदार गज़ल
बेहद सुंदर रचना....
बधाई वर्मा जी !
बेहद सुंदर रचना....
बधाई वर्मा जी !
bahot achche.......
सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं
बेपनाह मुहब्बत का सबूत और क्या होगा,पत्थरों के गांव में ठहरनें लगा है आइना...बहुत ही खूबसूरती से पिरोया गया है शब्दों को..बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ।
सभी शेर बहुत बढ़िया, ये ज्यादा ख़ास लगे...
उकेरता नहीं किसी और का प्रतिबिम्ब यह
रात ढलते ही देखिये कहरने लगा है आईना
बेपनाह मुहब्बत का सबूत और क्या होगा
पत्थरों के गांव में ठहरनें लगा है आइना
दाद स्वीकारें.
bahut sunder.
बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतिकरण,आभार है आपका
आज की मेरी नई रचना जो आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है
ये कैसी मोहब्बत है
उकेरता नहीं किसी और का प्रतिबिम्ब यह
रात ढलते ही देखिये कहरने लगा है आईना
बेहतरीन व खुबसूरत गजल
साभार !
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