रविवार, 9 मई 2010

माँ अमलतास है ~~

माँ एक शब्द नहीं
एहसास है
एक अटूट रिश्ता;
एक विश्वास है
कभी देखना गौर से
बच्चे के लिये
स्वेटर बुनते हुए उसे
ऊन को जब वह
तीलियो से उलझाती है
अपने मन की अनगिनत गांठ
खोलती है; सुलझाती है
लोरियां गाती है
सारी रात नहीं सोती है
पर बच्चे की पलकों पर
सपन बोती है
कितना बेफिक्र होता है बच्चा
जब माँ आसपास है
माँ एक शब्द नहीं ---
बच्चा जब संत्रास में होता है
अधबने मकान सा
माँ ढह जाती है
बच्चे के आंसुओं संग
खुद ही बह जाती है
ममतामयी माँ तो
अमलतास है
माँ एक शब्द नहीं
एहसास है
एक अटूट रिश्ता;
एक विश्वास है

चित्र : गुगल सर्च (साभार)

8 comments:

ललित शर्मा ने कहा…

माँ को नमन

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

मातृ-दिवस की बहुत-बहुत बधाई!
ममतामयी माँ को प्रणाम!

zeal ने कहा…

maa to amaltaas hai....

Lekin...

Kaash koi samjhaye- 'pita' kya hai?

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

माँ एक कभी न क्षीण होने वाला नाम है, वर्मा जी बहुत खूबसूरत शब्दों में माँ की महिमा कही आपने...बहुत अच्छा लगा..मातृ दिवस की बधाई

Shobhna Choudhary ने कहा…

बहुत ही बढ़िया तुलना की है

nilesh mathur ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कविता है,मातृ दिवस की शुभकामना, हर माँ को मेरा नमन!

वन्दना ने कहा…

मातृ-दिवस की बहुत-बहुत बधाई!

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

माँ एक शब्द नहीं
एहसास है
एक अटूट रिश्ता;
एक विश्वास है

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