सोमवार, 31 मई 2010

'पीना और जीना'

वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में मेरी व्यंग्य रचना 'पीना और जीना' पढने के लिये क्लिक करें

पीना और जीना

4 comments:

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

पढ़ ली सर , बहुत अच्छी है , चूँकि उस प्रतियोगिता पर मैंने सुरु से कोई भी टिपण्णी नहीं लिखी इसलिए इस बार भी नहीं लिखी !

Jandunia ने कहा…

nice

Udan Tashtari ने कहा…

पढ़ लिए हैं सर पहले ही.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सूचना के लिए आभार!

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