शनिवार, 29 मई 2010

ये हरामज़ादे नौकर भी ऐसे ही हैं ~ ? ~ (लघुकथा)

आज तो आप छा गये, क्या लच्छेदार बोले आप !! देखा नहीं लोग तालियाँ किस कदर पीट रहे थे.

अजी ज़र्रानवाजी है आपकी.

और आपने विषय भी तो ज़बरदस्त लिया था, वो क्या था! हाँ याद आया - "बाल मजदूरी समाज के लिये कलंक"

जी हाँ!

अच्छा अब मुझे इजाजत दीजिये.

अरे नहीं! ऐसे कैसे, चाय तो पीते जाईये. अरे छोटू! कहाँ मर गया? ये हरामज़ादे नौकर भी ऐसे ही हैं? खाते समय इनकी फुर्ती देखते बनती है और काम के समय तो जैसे जान निकल जाती है.

जी मालिक!

मालिक के बच्चे! जा जल्दी से चाय बना के ला.

और 10 वर्षीय छोटू चाय बनाने चला गया.

बैठक से अभी भी विषय गाम्भीर्य, प्रस्तुतीकरण तथा समाज पर पड़ने वाले प्रभाव की चर्चा ज़ारी थी.

18 comments:

shikha varshney ने कहा…

saje drowing room men baithkar gareebi par charcha...kuchh esa hi hota hai bas. kya karen

दीपक 'मशाल' ने कहा…

कथनी और करनी में भेद मिटाना बहुत जरूरी है सर.. वर्ना इन्हीं महाशय जैसे लोग भाषण दे दे के आगे बढ़ते रहेंगे.. बस्स.. बढ़िया लघुकथा.

Udan Tashtari ने कहा…

यही है समाज को दोमूहा चरित्र.

Suman ने कहा…

nice

Razia ने कहा…

विसंगतियों को उकेरती
तथा कथनी और करनी में अंतर बताती अच्छी रचना

honesty project democracy ने कहा…

सही लिखा वर्मा जी सिर्फ भाषण से काम नहीं चलता है बल्कि चरित्र व्यवहार में भी दिखना चाहिए ,लेकिन यही तो दुर्भाग्य है इस देश और मनुष्य का की लोग कहते कुछ हैं और होते कुछ है ,इस वोरोधाभास को हमें मिटाने का प्रयास करना चाहिए /

'अदा' ने कहा…

haathi ke daant dikhaane ke aur khaane ke aur hote hain...aur aise vishay..drawing room ya dinning table par shuru hote hain aur vahi dam tod dete hain...dunia chalti hi rahti hai... in chhotuo ki kismat bhi HARAM-----ban kar nikal leti hain...
dinio o dunia tera jawaab nahi...!!

राजकुमार सोनी ने कहा…

दोगला चरित्र शायद यही है। बोलो कुछ करो कुछ। ऐसे लोग केवल नेता ही नहीं है यह हर जगह मौजूद है। ब्लागजगत भी इससे अछूता नहीं है।
बाकी आपकी रचना शानदार है।

वन्दना ने कहा…

yahi to vidambna hai.........dohre vyaktitva ko jeete sabhi mil jayenge.

Mithilesh dubey ने कहा…

यही है समाज को दोमूहा चरित्र.

sangeeta swarup ने कहा…

विसंगति को बताती अच्छी लघु कथा...

nilesh mathur ने कहा…

कमाल है, इतने कम शब्दों में भी कोई इतनी बड़ी बात कह सकता है! बेहतरीन लघु कथा !

aarkay ने कहा…

सब कुछ दारू पी कर नशाबंदी पर भाषण देने जैसा है .
दोहरे मापदंड हमारी फितरत बन चुकी है.

राजेन्द्र मीणा ने कहा…

कम शब्दों में बेहतरीन लेखन

माधव ने कहा…

अच्छी रचना.... साधुवाद..

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

यही सच्चाई है सर

महफूज़ अली ने कहा…

सजे ड्राविंग रूम में बैठकर गरीबी पर चर्चा ...कुछ ऐसा ही होता है बस . क्या करें ....?

अरुणेश मिश्र ने कहा…

प्रशंसनीय ।

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