गुरुवार, 16 जून 2011

लाईन सीधी हो गई ...

वह लाईन के कुछ हिस्से को मिटाता और फिर उसे सीधी करने का प्रयास करता. बारम्बार कोशिशों के बावजूद वह सफल नहीं हो पाया. हाँ ! इस प्रयास में लाईन और टेढ़ी होती जा रही थी. अंत में वह खीज गया और पूरी की पूरी लाईन मिटा दिया तथा उसके स्थान पर एक दूसरी लाईन खींच दी. अरे यह क्या ! लाईन तो बिलकुल सीधी हो गई.

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9 comments:

Sunil Kumar ने कहा…

वर्मा जी यह लघु कथा तो ऊपर से निकल गयी समझने की कोशिश करता हूँ टिप्पणी बाद में

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

नए सिरे से किया गया प्रयास सफलता देता है ..अच्छी प्रस्तुति

रश्मि प्रभा... ने कहा…

yah sidhi line mann ki udhedbun se nikli ek rahat hai

Jyoti Mishra ने कहा…

Sometimes its beneficial to start something afresh instead of doing the same thing again and again in which we are unable to succeed.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी की चर्चा कल शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी है!

sushma 'आहुति' ने कहा…

acchi parstuti....

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत सटीक प्रस्तुति..

vidya ने कहा…

वाह.....
बहुत गहरी बात..
अदभुद प्रस्तुति..

dinesh aggarwal ने कहा…

हृदय को छूती हुई रचना, निश्चित ही सराहनीय...

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