शुक्रवार, 11 मई 2012

जब से पत्थर इतने रंगीले हो गए …

आईनों के चेहरे
पीले हो गए
जब से पत्थर इतने
रंगीले हो गए
.
आईना
टूटकर बिखर जाता है
जब भी खुद को
आईने के सामने पाता है
.
आईना
उनकी आँखों के ‘आईने’ में
खुद को निहारता है,
वे संवरने आयें
इससे पहले ही
खुद को संवारता है

19 टिप्‍पणियां:

डॉ टी एस दराल ने कहा…

वाह !
आईने पर यह प्रयोग बढ़िया लगा ।

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

वाह,वाह!!

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - जस्ट वन लाइनर जी

Pallavi saxena ने कहा…

वाह बहुत बढ़िया....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
आपकी प्रविष्टी की चर्चा आज शनिवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
चर्चा मंच सजा दिया, देख लीजिए आप।

अजय कुमार झा ने कहा…

तीनों टुकडे प्रभावी लगे वर्मा जी । बहुत ही खूबसूरत और बहुत ही उम्दा । आईने पर खूबसूरत बातें

रश्मि प्रभा... ने कहा…

bahut khoob

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

वाह!

रविकर ने कहा…

शुभकामनाएं |
सर जी -
बेहतरीन रचना ||

virendra sharma ने कहा…

आईनों के चेहरे

पीले हो गए

जब से पत्थर इतने

रंगीले हो गए

आइना एक निहारने वाले अनेक ,सूरत सके न कोई देख .बहुत बढ़िया बिम्ब हैं आईने के देखने वालों को दिखलाई देने वालों को -

हर आदमी में होतें हैं दस बीस आदमी ,

जिसको भी देखना कई बार देखना .
li.बधाई स्वीकार करें .कृपया यहाँ भी पधारें -
शनिवार, 12 मई 2012
क्यों और कैसे हो जाता है कोई ट्रांस -जेंडर ?
क्यों और कैसे हो जाता है कोई ट्रांस -जेंडर ?
http://veerubhai1947.blogspot.in/

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

गहन अभिव्यक्ति ... आईना सा दिखाती

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

.


वाह जी वाह !

आईने को प्रतीक बना कर अच्छी क्षणिकाएं लिखी हैं …
बधाई !

Rajesh Kumari ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ठ प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार १५ /५/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की गई है |

मेरा मन पंछी सा ने कहा…

waah||||
bahut sundar:-)

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" ने कहा…

aaina beshak saja sanwara...per wo aayee naa..bahu hee tarah se aaine ka pryaog kiya hai ..sadar badhayee aaur amantran ke sath

Kailash Sharma ने कहा…

आईना

उनकी आँखों के ‘आईने’ में

खुद को निहारता है,

वे संवरने आयें

इससे पहले ही

खुद को संवारता है

....लाज़वाब अहसास ! बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

prritiy----sneh ने कहा…

aaine par achhe bandh likhe hai

shubhkamnayen

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

सुन्दर रचना।