आदमी
देख नहीं सकता,
यदि आँखें न हों।
सुन नहीं सकता,
यदि कान न हों।
बोल नहीं सकता,
यदि मुँह न हो।
लेकिन—
आँखें होते हुए भी
जो देखता नहीं,
कान होते हुए भी
जो सुनता नहीं,
और
मुँह होते हुए भी
जो बोलता नहीं—
ऐसे आदमी
सबसे ज़्यादा मिलते हैं।
वे भीड़ में नहीं खोते,
क्योंकि
भीड़
उन्हीं से बनती है।

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