गुरुवार, 9 जुलाई 2026

ज़द से बाहर

तुम्हारी सोहबत का ही असर था,
कि मैं लड़खड़ा रहा था।

मेरी इसी लड़खड़ाहट को देखकर
ट्रैफिक पुलिस ने मुझे रोक लिया।

मुँह से लगाया ब्रेथलाइज़र,
वह हैरान था
अल्कोहल का स्तर
शून्य था।

मैं मुस्कुरा दिया...

नशे में तो था मैं,
मगर उस नशे में
जो किसी मशीन की ज़द में नहीं आता।

उसे नशा मत कहिए साहिब,
अहले-दिल जानते हैं
उसे तो सुरूर कहते हैं।

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