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शनिवार, 5 जून 2010

पीठ पर आक्सीजन ~~

लतर ने अपना लंच और पानी का कैप्सूल पाकेट में डाला, होमवर्क का माईक्रोचिप कलाई पर चिपकाया और स्कूल जाने के लिये तैयार हो गयी. उसने माँ से कहा कि वह स्कूल जा रही है. माँ ने उसे उसका नया नवेला 20 किलो की क्षमता वाला आक्सीजन सीलिंडर उसके पीठ पर बाँधा. वह वज़न से दुहरी हो गयी.
लतर : माँ यह बहुत भारी है.
हरीतिमा : कोई बात नहीं बेटा तुम्हें तो पता है कि ले जाना ही पड़ेगा. तुम्हें तो पता है कि तुम्हारा स्कूल Oxygen-Conditioned नहीं है. और फिर यह उतना भी भारी नहीं है जितना पहले के बच्चे बस्ते ले जाते थे.
लतर : पर माँ ... मेरी पीठ में यह सीलिंडर चुभता है.
हरीतिमा : अच्छे बच्चे जिद नहीं करते.
और लतर स्कूल चली गई.
हरीतिमा काम में लग गयी. वह टेलिविजन के उस समाचार के बारे में सोचने लगी :
"आज फिर शहर में आक्सीजन रिफिलिंग सेंटर बन्द हैं. यह आक्सीजन का उत्पादन करने वाली यूनिट के एक सीलिंडर के फट जाने के कारण हुआ है. आक्सीजन की कमी के कारण जमाखोरी बढ़ गयी है और नकली आक्सीजन की आपूर्ति के कई मामले पकड़े गये हैं. सरकार हमेशा की तरह मामले को गम्भीरता से ले रही है. आक्सीजन मंत्री श्री कार्बन डाई जी ने आश्वासन दिया है कि शीघ्र ही स्थिति काबू में आ जायेगी."

हरीतिमा ने दुश्चिंता मे अपने लिये आक्सीजन की आपूर्ति को और कम कर दिया.
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......... पर्यावरण के प्रति न चेते तो यह स्थिति दूर नहीं है.