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सोमवार, 31 मई 2010

गुरुवार, 27 मई 2010

आधा तुम्हारे लिये और आधा मेरे लिये, बाकी बचे सो ... (लघुकथा)

उसने अपनी प्रजा से कहा जाओ और मेहनत करो, खेतों में रोटियाँ उगाओ. हम तुम्हें खुशहाल देखना चाहते है.

उसके कारिन्दे उन्हें शर्ते बताने लगे :

"कोई भी रोटी खाने की हिमाकत न करे. उत्पादित रोटी पहले यहा लाया जायेगा. राजा पहले उसका निरीक्षण करेंगे और फिर तुम्हें तुम्हारा हिस्सा मिल जायेगा."

लोग चले गये. मेहनत की और कुल एक सम्पूर्ण रोटी का उत्पादन किया. वे उसे लेकर कारिन्दे के पास आये. कारिन्दे ने रोटी लिया और राजा के पास ले गया. रास्ते में एक टुकड़ा रोटी कम हो गया (??). जब राजा ने नुचे हुए हिस्से के बारे में पूछा तो कारिन्दे ने बताया कि खेत में कोई दोष है, रोटी ऐसी ही उत्पादित हुई थी.

image

राजा ने कहा इसे दो हिस्से में बांट दो. एक हिस्सा मैं खा लेता हूँ और दूसरा तुम खा लो, बाकी जो बचेगा वह लोगों में बांट देना.

कारिन्दा हैरान था आखिर बचेगा क्या जो बांटा जायेगा. उससे रहा नहीं गया, उसने राजा से पूछ लिया. राजा को उसकी मूर्खता पर हैरानी हुई. उन्होने बताया, "जब हम खायेंगे तो जूठन नहीं बचेगा क्या" वही बाँट देना.

कारिन्दा ने वैसा ही किया. जनता अपना हिस्सा पाकर निहाल हो गयी. राजा के जयकारे लगने लगे.

बुधवार, 19 मई 2010

'कुत्तों पर रिसर्च' ~~

वैशाखानन्द प्रतियोगिता में मेरी रचना 'कुत्तों पर रिसर्च'

पढ़ने के लिये क्लिक करें :

 

वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में : श्री M VERMA

http://www.taauji.com/2010/05/m-verma_19.html

मंगलवार, 30 जून 2009

चार दुधमुहे बच्चे मरे हैं ---


ये आग जो लगी है
जल्दी काबू कर ली जाती
पर क्या करें सभी कर्मचारी अभी तक तो
पिछली लगी आग को ही बुझा रहे हैं
वे तो बहुत मसरूफ हैं
आग फ़िर न लगे इसके उपाय सुझा रहे हैं
और फ़िर
इतनी बड़ी आग पर जल्दी काबू पाना भी
आग की तौहीन है
आग तो आग है
इसका क्या!
यह कभी लग जाती है
तो कभी लगाई जाती है
इसी तरह तो
सोती कौम जगाई जाती है
गनीमत है कि हादसा बड़ा नहीं हुआ
अब तक कोई मुद्दा खड़ा नहीं हुआ
क्या कहा 'कैजुअल्टी' ?
अरे! वह तो न के बराबर है
सिर्फ़ चार दुधमुहे बच्चे मरे हैं
बाकी सब पहले भी अधमरे थे
आज भी अधमरे हैं
एक झोपडी में सो रहा
उसका बाप मारा है
मैं तो कहता हूँ
सिसक-सिसक कर जी रहा था
यूँ समझो कोई पाप मारा है
वह जो कोने में बैठी है चुपचाप
अरे वही
जो अधजली चुनर से लिपटी है
जी हाँ !
जिसकी पिछले महीने शादी हुई थी
उसका निठल्ला पति मरा है
बाकी सब ठीक है
माहौल बस डरा-डरा है
.
अजी! आग अभी बुझाये कैसे
अभी 'उनको' भी आना है
आग बुझाने का उद्घाटन तो
उन्हीं से करवाना है
वे आते ही कम्बल बाटेंगे
आश्वासन और संबल बाटेंगे
ये कितने खुशकिस्मत हैं
इन्हे तो 'लाइव' दिखाया जाएगा
आग के बीच दम तोड़ता
इनका 'लाइफ' दिखाया जाएगा
वो जिंदा ही कहाँ था
जो अभी-अभी मरा है
माहौल बस डरा-डरा है
माहौल बस -----