गुरुवार, 24 सितंबर 2009

रावण फ़िर अस्तित्व ले रहा है ~~~


रावण अस्तित्व ले रहा है
हर रामलीला ग्राऊँड के बाहर
न जाने कितने कारीगर लगाये गये हैं
पिछले साल से बड़ा रावण बनाने के लिये
कोई इसका हाथ बना रहा है
कोई धड़, कोई सिर तो कोई पैर
कोई इसका जिस्म बना रहा है
कोई इसका तिलिस्म बना रहा है
अभी यह पड़ा रहेगा
पर एक दिन यह खड़ा हो जायेगा
देखते देखते कद में
राम से बड़ा हो जायेगा
तय है कि इस बार भी यह
राम के हाथों मारा जायेगा
फिर इसका दहन होगा
इस तरह परम्परा निर्वहन होगा

हम क्यूँ भूल जाते हैं
रावण के मायावी स्वरूप को
जब राम का तीर चलेगा
वह हमारे बीच ही बैठा देख रहा होगा
हमारे द्वारा ही बनाये
रावण के पुतले के ढहन को
और फिर उसके दहन को

हर बार की तरह इस बार भी
राम का निशाना चूक जायेगा
रावण फिर नही मरेगा
वह वर्षपर्यंत अट्टहास करेगा
और फिर अगले साल फिर ----

26 comments:

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

Waah..bahut badhiya vyang kahe ya sachchi khub achhe se kavita me piroya hai aapne...khubsurat vichar...aakhir ravan marata kyon nahi hai..har jagah kisi na kisi rup me dikh hi jata hai is duniya me....badhiya rachana..badhayi

Nirmla Kapila ने कहा…

वर्मा जी बिलकुल सही कहा आज फिर निशाना चूक जायेगा एक रावन हो तो मर भी सकता है यहां तो जगह जगह रावण भरे पडे हैं बदिया कटाक्ष है आभार्

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

बहुत सुन्दर !
बस हम लोग तो दिल की तसल्ली कर देते है मगर रावण जिन्दा रहता है और अगले बरस और भी बड़े कद में नजर आयेगा, वह मरा नहीं, खूब ऐश कर रहा है ! मर तो सिर्फ वे सीधे-साधे और वीर जटायु रहे है, जो इस जैसे दानवों से सीता मैया को बचाने की कोशिश कर रहे है !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

रावण!
हर साल लाखों जलाते है,
अगले साल,
करोड़ों पैदा हो जाते हैं।

सुन्दर रचना है।
बधाई!

ओम आर्य ने कहा…

बिल्कुल सटिक .........आप बहुत ही सुन्दर से अपनी भावनाओ को अभिव्यक्त करते है!

ओम आर्य ने कहा…

बिल्कुल सटिक .........आप बहुत ही सुन्दर से अपनी भावनाओ को अभिव्यक्त करते है!

कोपल कोकास ने कहा…

हम भी दशहरा देखने जायेंगे ...

Razia ने कहा…

बहुत सुन्दर, समसामयिक और सारगर्भित रचना के लिये बधाई

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

सारगर्भित रचना ......

योगेश स्वप्न ने कहा…

verma ji, vishwas par duniya kayam hai, ravan ek din zaroor marega.

sunder rachna ke liye badhaai.

सुरेश शर्मा (कार्टूनिस्ट) ने कहा…

लीजिये आ गए आपके रावण को देखने..भाई वाकाई आपका रावण तो जोरदार है और जबरदस्त है आपकी लेखनी..आभार !

Sudhir (सुधीर) ने कहा…

वर्मा जी, अच्छी और विचारपरक रचना...सार्थक चिंतन लिए हुए. साधू !!

रज़िया "राज़" ने कहा…

हम क्यूँ भूल जाते हैं
रावण के मायावी स्वरूप को
जब राम का तीर चलेगा
वह हमारे बीच ही बैठा देख रहा होगा
और..
हर बार की तरह इस बार भी
राम का निशाना चूक जायेगा
रावण फिर नही मरेगा
वह वर्षपर्यंत अट्टहास करेगा
और फिर अगले साल फिर ----
लाजवाब रचना॥

बिल्कुल सही है आपकी रचना। सलाम हो आपकी इस रचना पर।

वन्दना ने कहा…

behtreen kataksh hai..........ravan kabhi nhi marta insaan mein kahin na kahin ek ravan majood hai bas use dhoondhna hoga aur uska jis din vadh hoga tabhi asliyat mein ravan ka maran hoga..........aapki rachna dil ko choo gayi........aise hi logon ko jagate rahiye.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच है वर्मा जी ......... गली गली में आज रावण जिन्दा है और साल दर साल इसकी संख्या बढती जा रही है ........ एक समय आएगा इस दुनिया में बस रावण ही रावण नज़र आयेंगे ........... लाजवाब है कविता, गहरा अर्थ लिए ........

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Ekta ने कहा…

जब राम का तीर चलेगा
वह हमारे बीच ही बैठा देख रहा होगा
सही कहा रावण और कही नही हमारे बीच ही है

महफूज़ अली ने कहा…

waah! ekdum sahi......... wwaqai mein raavan to hum logon ke beech mein aaj bhi zinda hai..........aur hamesha rahega....

Girish Pankaj ने कहा…

रावन को लेकर आपकी चिंता जायज है. बेशक रावन फिर अस्तित्व ले रहा है. मुझे यह देख कर ख़ुशी हुई की आपने भी रावन पर कविता लिखी. संयोग है कि मेरा जन्म बनारस का है. आप वहां पले-बढे है. आप दिल्ली में, तो मै रायपुर में रह रहा हूँ. आपके ब्लॉग को भी देखा. सुन्दर है, पठनीय भी. कुछ के ब्लॉग सुन्दर तो है पर पठनीय नहीं. मई अभी नया-नया हूँ. मुश्किल से दो माह हुए है. धीरे-धीरे सब से संपर्क होगा. जैसे दो महीने बाद आप मिले.

अल्पना वर्मा ने कहा…

पर एक दिन यह खड़ा हो जायेगा
देखते देखते कद में
राम से बड़ा हो जायेगा

--ऐसा प्रतीत होता है अब यह सच में राम से अधिक बड़ा हो गया है इसके दहन की आवश्यकता है.
बहुत अच्छी सामायिक रचना.

Apanatva ने कहा…

paramparao ka nirvah to jor shor se chanda ikattha karke ho jata hai par iasaniyat, bhai chare , manav dharm ka narvah ? mujhe intajar hai us din ka jab samaj bure ko nahee burai ko khatm karane ka aavhan karega .
bahut hee acchee rachana .

सर्वेश दुबे ने कहा…

koi sab nahi hai Aap ki kavitao ki prasansa ke liye .Aakhir kitni bar Aap ki kavitao ki prasansa ki jaye ..... Aap Mahan hai ...

Babli ने कहा…

वाह बहुत सुंदर रचना लिखा है आपने बिल्कुल सच्चाई बयान करते हुए! हैरानी की बात तो ये है कि हर साल रावण को जलाने पर भी लाखों रावण और पैदा हो जाते हैं और जो हम सब के बीच मौजूद रहते हैं!

रंजना ने कहा…

बहुत बहुत बहुत ही सही कहा आपने.....प्रतिदिन बढ़ रहे रावण के प्रभाव से मुक्ति संभव कहा दीखती है.....

अतिसुन्दर सार्थक रचना के लिए आभार आपका..

ज्योति सिंह ने कहा…

bahut badhiya .sundar rachana .

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…

सही कह रहे हैं आप। हम सब आपकी चिंता में शामिल हैं।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Template by:

Free Blog Templates