मंगलवार, 25 मई 2010

ब्लागर मिलन में उपजी नई सम्भावना ~~

दिल्ली ब्लागर मिलन (23 मई 2010) अन्य कई ब्लागर मिलन से कुछ मायनों में ज्यादा सकारात्मकता दे गया. आशंकित मन से ब्लागर मिलन का प्रारम्भ बेशक थोड़ा बिलम्ब से हुआ हो पर बाद में यह केवल मिलन न रहकर (वैसे मिलन तो था ही) नवीन सम्भावनाओं के तलाश का सुन्दर पटल बन गया. जिसमें ब्लागर संगठन की आवश्यकता प्रमुख है. भाई जय कुमार झा के द्वारा एक और सम्भावना की चर्चा हुई जो काफी कुछ भविष्य की सकारात्मक ब्लागिंग/शिक्षा को दिशा देने वाली हो सकती है. वह है प्राईमरी पाठ्यक्रम में ब्लागिंग को शामिल करवाने के लिये प्रयास करने का.

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हालांकि मिलन के दौरान यह भावी सम्भावना के रूप में उभरकर आई पर ज्यादा चर्चा इस पर केन्द्रित न हो सकी. वस्तुत: यह एक अत्यंत प्रभावी कदम हो सकता है दिग्भ्रमित शिक्षा को दिशा देने में पर अगर हम इसके लिये अभी प्रयास करते हैं तो जल्दबाजी ही होगी, क्योंकि ब्लागिंग की वर्तमान स्थिति समग्र रूप से सकारात्मक तो है पर जितना होना चाहिये उतना नही. आपसी छींटाकशी ब्लागिंग की ऊर्जा को अपव्यय कर रही है और कभी-कभी अशोभनीय. कल्पना करना होगा कि यदि ऐसे में अल्प वय के विद्यार्थी भी ब्लागिंग में आ जाते हैं तो वे ब्लाग के इस मनोदशा को अवश्य ही कौतूहल से देखेंगे और ब्लागिंग उन्हें क्या दे पायेगी कह पाना मुश्किल है. कई बार बड़ी उम्र के नए ब्लागर को असमंजस की स्थिति में आ जाना पड़ता है तो कमसिन वय के विद्यार्थियों की क्या स्थिति होगी आसानी से समझा जा सकता है. निश्चित ही इस दिशा में पहल होनी चाहिये कि इस तरह के माहौल से निजात मिले.

मैं अध्यापक हूँ और उस दिन की कल्पना में लीन हो चुका हूँ जब मेरे हर विद्यार्थी का एक ब्लाग होगा इसके लिये विद्यालय के कालांश में ब्लागिंग का भी कालांश निर्धारित किया गया होगा. इस दिशा में प्रयास होना चाहिये पर उससे पहले समवेत रूप से ब्लागिंग के स्तर को भी पटरी पर लाने का भी सामूहिक और वैयक्तिक रूप से प्रयास होना चाहिये.

13 comments:

दीपक 'मशाल' ने कहा…

आमीन...

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

सही बात...

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

मास्‍टर जी आप तनिक भी चिंतित न हों बस चिंतन में डूबे रहें। जल्‍द ही और भी धांसू आइडिए बाहर आने वाले हैं थिंकटैंक से। अब यह मत पूछना कि वो थिंकटैंक कौन है ?

Suman ने कहा…

nice

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

उपयोगी तथा नाइस सुझाव!

honesty project democracy ने कहा…

ये हम सब के सार्थक प्रयास से ही संभव है की बच्चें IAS ,IPS ,डॉक्टर और इंजिनियर बनने के साथ-साथ एक अच्छा इन्सान बनने का भी सपना देखे / आज अच्छे इन्सान की बड़ी आवश्यकता है वर्मा जी और उसके लिए हम सब को सोचना होगा / इस प्रस्तुती के लिए आपका धन्यवाद /

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

जय जी से पहली मुलाकात थी उनकी बात बहुत ही प्रभावशाली लगी..एक अच्छे व्यक्तित्व के बारें में जान कर अच्छा लगा...ब्लॉग जगत में ऐसे सामाजिक सोच वालें भी भरे हैं....फिर तो निश्चित रूप से ब्लॉगिंग के सार्थकता की ओर बढ़ेगी...आभार

Udan Tashtari ने कहा…

निश्चित ही इस दिशा में प्रयास होना चाहिये.

anitakumar ने कहा…

वर्मा जी बड़िया रिपोर्टिंग है। आप ने एक आशंका जताई है कि अगर कम उम्र और बड़ी उम्र वाले दोनों ब्लोगर्स होगें तो दोनों के लिए असमंजस की स्थिती होगी। लेकिन अगर देखा जाए तो यहां तो अभी भी सभी उम्र के ब्लोगर हैं, सब के अपने अपने मुह्ल्ले बन जाते हैं, यही हाल दूसरी सोशल नेटवर्किंग में भी है। इस लिए चिंता की कोई बात नहीं।

Shah Nawaz ने कहा…

वर्मा जी बहुत खूब. आप चिंता मत करिए, सब के प्रयास से सब कुछ संभव है.

Hindiblog Jagat ने कहा…

ब्लौगर संगठन क्या करेगा और क्या नहीं?

क्या यह संगठन लोगों को सदस्यता देगा? संगठन बनेगा तो सदस्य भी बनेंगे.
ऐसे में यदि कोई ब्लौगर उस संगठन से नहीं जुड़ना चाहेगा तो क्या उसका बायकाट किया जा सकता है?

एक संगठन बनेगा तो विरोधी संगठन बनने में देर नहीं लगेगी. क्या इसे भी राजनीति का मैदान बनायेंगे?

संगठन होगा तो पदाधिकारी भी होंगे. उनके चयन के लिए चुनाव भी होंगे.
चुनाव होगा तो फिर गुटबाजी, कलह और भितरघात भी होगी.
कुल मिलकर इससे बहुत कुछ लाभ होना नहीं है.

सरकार को तो संगठन का रौब डालकर दबाया नहीं जा सकता.
जब सरकार अपनी करनी पर आती है तो उसके आगे किसी की नहीं चलती.
बेहतर होगा कि इन सब फालतू की बातों की ओर से अपना ध्यान हटाकर अपना समय अच्छा पढने और अच्छा लिखने में लगायें.

मानता हूँ कि एकता में बड़ी शक्ति होती है, लेकिन आप यहाँ पर अपनी नेटवर्किंग करने आये हों या अपने समय और रचनात्मकता का बेहतर सदुपयोग करने?

आप सब समझदार ब्लौगर हैं, ज़रा कायदे से सोचें. हमें किसी संगठन की ज़रुरत नहीं है.

राजकुमार सोनी ने कहा…

ऊपर ये हिन्दी ब्लाग जगत वाले को अजय झा साहब के ब्लाग पर भेजो। मेरे पास .... के लिए समय नहीं है नहीं तो जवाब देता।

राजीव तनेजा ने कहा…

अगर हमारी इस ब्लॉगर मुलाकात में पैदा हुए बीज अपने शैशवकाल को छोड़ नियत समय पर संपूर्ण फसल बन कर बाहर निकले..तभी इसे सार्थक पहल कहा जाएगा

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