सोमवार, 11 अप्रैल 2011

सबसे सुरक्षित स्थान ... (लघुकथा)

पूरा महकमा हलकान था। शहर में चोरों का तांडव था और हवा में एक अजीब-सी घुटन घुलती जा रही थी। सरकार ने सख्त फरमान जारी किया—“किसी भी कीमत पर आम आदमी को यह भरोसा दिलाया जाए कि उसकी सुरक्षा सर्वोपरि है,” क्योंकि लोकतंत्र में भरोसा भी एक आंकड़ा होता है—वोटों के साथ जुड़ा हुआ।

पुलिस ने आम आदमी की सुरक्षा के नाम पर शहर को सुरक्षा-जाल में लपेट दिया। जगह-जगह बैरकें, चेकपोस्ट और ‘सुरक्षित मार्ग’ बनाए गए—नतीजा यह हुआ कि रास्ते इतने सुरक्षित हो गए कि चलना ही असंभव हो गया। आम आदमी फिर भी कहीं न कहीं चपेट में आता रहा, और अपराधी नियमों की दरारों से मुस्कुराते हुए गुजरते रहे।

आपात बैठक बुलाई गई। फाइलें खुलीं, आँकड़े बोले, और समाधान तलाशा गया। लंबी बहस के बाद एक क्रांतिकारी निर्णय हुआ—अगर अपराध खत्म नहीं हो पा रहा, तो अपराध का “लक्ष्य” ही खत्म कर दिया जाए। यानी आम आदमी को ही किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाए।

तर्क सरल था—जहाँ शिकार ही नहीं, वहाँ शिकारी भी नहीं।

योजना तुरंत लागू हुई।

और वह असाधारण रूप से सफल रही।

अब शहर में कोई अपराध नहीं होता।

क्योंकि अब शहर में कोई “आम आदमी” नहीं बचा।

बाकी सब सुरक्षित हैं—अंदर से बंद, और बाहर से “कानूनन सुरक्षित” घोषित जेलों में।

और शहर?
वह अब पूरी तरह शांत है—इतना शांत कि सवाल तक नहीं उठते।

12 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

सुन्दर लघुकथा!

डॉ टी एस दराल ने कहा…

हालात तो कुछ ऐसे ही हैं । सुन्दर ।

Unknown ने कहा…

kaarigari ka kaam...nice post !

Dr. Yogendra Pal ने कहा…

बिल्कुल सही कहा आपने

Udan Tashtari ने कहा…

जबरदस्त!!!!

वाणी गीत ने कहा…

यही है सरकार की उलटबांसी ...

Shah Nawaz ने कहा…

:-) ज़बरदस्त कटाक्ष किया है....

विनोद पाराशर ने कहा…

मुझे भी सबसे सुरक्षित स्थान की तलाश थी.शुक्र हॆ आपने बता दी.एक सीट मेरी भी रिजर्व करवा देना.सुंदर लघुकथा के लिए धन्यवाद!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

gr8

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

आदरणीय वर्मा जी
सादर सस्नेहाभिवादन !

अच्छा उपाय किया :)

अलग ही प्रकार की लघुकथा है …
वास्तव में कई समस्याएं सहजता से समाप्त नहीं की जा सकतीं …

* श्रीरामनवमी की शुभकामनाएं ! *

- राजेन्द्र स्वर्णकार

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत यथार्थपरक व्यंग..बहुत सुन्दर

pragya ने कहा…

बढ़िया व्यंग्य!!