तुम्हारी सोहबत का ही असर था,
कि मैं लड़खड़ा रहा था।
मेरी इसी लड़खड़ाहट को देखकर
ट्रैफिक पुलिस ने मुझे रोक लिया।
मुँह से लगाया ब्रेथलाइज़र,
वह हैरान था—
अल्कोहल का स्तर
शून्य था।
मैं मुस्कुरा दिया...
नशे में तो था मैं,
मगर उस नशे में
जो किसी मशीन की ज़द में नहीं आता।
उसे नशा मत कहिए साहिब,
अहले-दिल जानते हैं—
उसे तो सुरूर कहते हैं।

13 टिप्पणियां:
सुंदर
Thanks 😊
Thanks 😊
जी हाँ, उसे सुरूर ही कहते हैं
😃
सुंदर
बहुत सुंदर रचना
शुक्रिया
शुक्रिया
Wahh!
Thanks 😊
वह क्या बात है ... उनका सुरूर क्या कहने ....
शुक्रिया
एक टिप्पणी भेजें