निरावेशन की शून्यता मुझे मंजूर नहीं है ....
हर तकरार में यूँ तो तुमसे हार जाता हूँ, और तुम हर बार पूरे कमरे में जीत की मुस्कान लिए फिरती हो।
तुम्हें कभी यह जाहिर नहीं होने दूँगा कि तुम्हारी वह मुस्कान हर बार मेरी ही जीत होती है।
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