रूठे बादलों
तुम्हारा रूठना सबक दे गया
बेशक तूँ हमारे दुख-दर्द
न हर
तय कर लिया है हमने
निकालेंगे यहीं से एक
नहर
………………………………
जैसे ही बादलों ने
धरा को
मेंह दी
उसे लगा
साजन आने वाले हैं
वह रचने लगी
मेंहदी
रूठे बादलों
तुम्हारा रूठना सबक दे गया
बेशक तूँ हमारे दुख-दर्द
न हर
तय कर लिया है हमने
निकालेंगे यहीं से एक
नहर
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जैसे ही बादलों ने
धरा को
मेंह दी
उसे लगा
साजन आने वाले हैं
वह रचने लगी
मेंहदी
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चटका लगाकर मूल आकृति में पढ़े : .......................
चिडियो ने
वतन है छोडा
विचरण करते यहाँ
अब तो चहुँ ओर
काग जी,
थोथे हैं
पक्षी संरक्षण के आँकड़े
ये तो हैं महज
कागजी.
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खयाली घोड़े
तुमने तो बहुत
कुदा ली,
लौट आओ हकीकत में
अब उठा ही लो
कुदाली.
