रविवार, 7 अप्रैल 2019
रविवार, 29 अप्रैल 2012
कथोपकथन हो गया …..
नजर मिली
नजर झुकी
कथोपकथन हो गया
मन बावरा
न जाने किन ख्वाबों में
खो गया
.
‘पत्थर’ ने
पत्थर मारा
चोट लगी
‘पत्थर’ को
पत्थरमय फिर
आसमान हो गया
‘पत्थर’ भी भागे
घर को
.
जुल्म को कभी
सह मत
गलत से
न हो कभी
सहमत
.
सोमवार, 16 अप्रैल 2012
अब तक तो वो आई ना
कि तुम नहीं
दृष्टिहीन हो,
पर फायदा क्या
जब तुम्हारे अंदर
दृष्टि ही न हो
*************
बिछा रखा था
जिसके लिये
हर राह में आईना
आस टूटने लगी है
अब तक तो वो
आई ना
***************
ओ री सखी !
अब तो शुरू कर दे
सजना
आ ही रहे होंगे
तुम्हारे
सजना
शनिवार, 7 अप्रैल 2012
शनिवार, 30 अक्टूबर 2010
‘यशस्वी भव’ ‘विजयी भव’ ~~
मंगलवार, 5 अक्टूबर 2010
शायद हम बन जायें कालिदास ~~
सोमवार, 7 जून 2010
निकालेंगे यहीं से एक नहर ~~
रूठे बादलों
तुम्हारा रूठना सबक दे गया
बेशक तूँ हमारे दुख-दर्द
न हर
तय कर लिया है हमने
निकालेंगे यहीं से एक
नहर
………………………………
जैसे ही बादलों ने
धरा को
मेंह दी
उसे लगा
साजन आने वाले हैं
वह रचने लगी
मेंहदी
बुधवार, 2 जून 2010
राख झाड़ दो ~~
....................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................
चटका लगाकर मूल आकृति में पढ़े : .......................
शनिवार, 15 मई 2010
अब उठा ही लो कुदाली .....
चिडियो ने
वतन है छोडा
विचरण करते यहाँ
अब तो चहुँ ओर
काग जी,
थोथे हैं
पक्षी संरक्षण के आँकड़े
ये तो हैं महज
कागजी.
************
खयाली घोड़े
तुमने तो बहुत
कुदा ली,
लौट आओ हकीकत में
अब उठा ही लो
कुदाली.




