आज तो आप छा गये, क्या लच्छेदार बोले आप !! देखा नहीं लोग तालियाँ किस कदर पीट रहे थे.
अजी ज़र्रानवाजी है आपकी.
और आपने विषय भी तो ज़बरदस्त लिया था, वो क्या था! हाँ याद आया - "बाल मजदूरी समाज के लिये कलंक"
जी हाँ!
अच्छा अब मुझे इजाजत दीजिये.
अरे नहीं! ऐसे कैसे, चाय तो पीते जाईये. अरे छोटू! कहाँ मर गया? ये हरामज़ादे नौकर भी ऐसे ही हैं? खाते समय इनकी फुर्ती देखते बनती है और काम के समय तो जैसे जान निकल जाती है.
जी मालिक!
मालिक के बच्चे! जा जल्दी से चाय बना के ला.
और 10 वर्षीय छोटू चाय बनाने चला गया.
बैठक से अभी भी विषय गाम्भीर्य, प्रस्तुतीकरण तथा समाज पर पड़ने वाले प्रभाव की चर्चा ज़ारी थी.
