आज दो बजे रात 'वनांचल एक्सप्रेस' के हादसे पर उपजे सवाल और सर्वसुलभ जवाब जो उपलब्ध हो रहे हैं या होंगे. एक लाईना जवाब यही होता है कि 'जाँच के आदेश दे दिये गये हैं" पर क्या मृतक के परिवार के लोगों के दिलों की भी जाँच होगी जिसमें स्थाई रूप से दु:ख और दर्द ने घर कर लिया है?
.
लगता है रेल के बड़े अधिकारी
लाईन (हाट लाईन, रेल लाईन नहीं) पर है
चलो उनसे ही पूछते हैं कि ...
जी नमस्कार!
हम जानना चाहते हैं कि
यह हादसा क्यों और कैसे हुआ?
“देखिये इतना बड़ा नेटवर्क है
छोटे-मोटे हादसे तो होते ही रहते हैं
कैसे का जवाब मैं क्या दूँ
मेरे मातहतों ने बताया है कि
दूसरे रेलगाड़ी ने पीछे से टक्कर मारी है
असलियत का पता तो तब चलता
जब टक्कर आगे से मारी गई होती”
टक्कर के बाद राहत कार्य
समय पर क्यों नहीं शुरू किया गया?
‘आप तो बस पीछे पड़ गये हैं
अरे! टक्कर रात के दो बजे हुई है
उस समय तो सारे अधिकारी सो रहे थे
नींद खुलते ही राहत भेज दी गई है
मुझे ही देखिये
कितना सुन्दर सपना आ रहा था
मुझे भी आप लोगों ने जगा दिया”
जी हादसे में कितने लोग मरे हैं?
”केवल सत्तर लोग”
पर सत्तर लोग तो ‘केवल’ नहीं होते
“आपका गणित लगता है कमजोर है
अरे! ट्रेन में तकरीबन दो हज़ार थे
और मरे सत्तर
ये केवल नहीं तो और क्या हैं?”
कौन दोषी हैं?
”यह तो जाँच के बाद ही पता चलेगा
पर लगता यही है कि
यात्री ही दोषी थे
क्योंकि वे सबसे पिछले डिब्बे में क्यों थे;
या फिर आज यात्रा पर ही क्यों थे
घर से गर ये न निकलते तो
अच्छे भले सो रहे होते
इनके अज़ीज तो आज
इस कदर न रो रहे होते”
हलो सर एक और सवाल ...
हलो आप सुन पा रहे हैं या नही? ..
लगता है हमारा सम्पर्क टूट गया ..
देखते रहिये .....