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बुधवार, 8 दिसंबर 2010

अगला धमाका होने तक ..


आज फिर

बम धमाका हुआ है,

प्रशासन फिर

नींद से जाग गया है.

लाल बत्ती युक्त गाड़ियाँ

फिर दौड़ने लगी हैं सड़कों पर

बैरकें लगा दी गयी हैं,

सड़क पर आवाजाही

प्रतिबन्धित कर दी गई हैं.

फिर

दिनचर्या को बार-बार

उलाहने दिये जायेंगे;

खुफिया कैमरे की

नई प्लान बनेगी;

हर आम आदमी को

रखा जायेगा सन्देह के दायरे में;

पूरा शहर रौशन होगा

कैमरे के फ्लैश से;

प्रायोजित जीजिविषा की तस्वीरें

बाँटी जायेंगी.

सरकार चाक-चौबन्द है

कुछ रातें नज़रों में ही

काटी जायेंगी,

फिर इंतजार किया जायेगा

जीवन सामान्य होने तक

तब तक नींद फिर हाबी होगी

प्रशासन की आँखों में

वह फिर सो जायेगी

अगला धमाका होने तक.

शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

निज प्रकम्पित अधरों से कुछ कहो आज तुम


निज प्रकम्पित अधरों से कुछ कहो आज तुम

अस्फुट-स्वर-बोध करा दो ना चुप रहो आज तुम

साक्षात मगर हो

दिवा-सपन सी

साहचर्य तुम्हारा

पूस-कपन सी

लजायमान स्पर्श-कामना को स्पर्श-बोध चाहिये

कल-कल-निनाद साधों को ना अवरोध चाहिये

बाधित आतुरता के कोमल भाव सहो आज तुम

निज प्रकम्पित अधरों से कुछ कहो आज तुम

भ्रमर गुंजन सी

श्वासों की लहरी

सम्पूर्ण कायनात

शायद है ठहरी

अनकहे सन्देशों ने जब सब कुछ कह डाला है

फिर क्यूँ इन मृद अधरों पर चुप्पी का ताला है

सागर-मिलन को आतुर लहरों सी बहो आज तुम

निज प्रकम्पित अधरों से कुछ कहो आज तुम

सोमवार, 20 सितंबर 2010

व्यस्तताओं का दौर, 100 वीं रचना और ...

लगभग एक माह की लम्बी व्यस्तता .. इतनी कि ब्लाग जगत से सर्वथा दूर कर दिया. इस दरमियान महज एक रचना 'जज्बात' ब्लाग पर. बाद में पता चला कि यह तो इस ब्लाग पर मेरी 100वीं रचना थी. इस सफर के इस शतक पर आभार उन तमाम हमसफर का जिन्होंने इस मुकाम तक लाने में अप्रतिम भूमिका निभाई; जिनके हौसला आफ़जाई के बिना यह सफर अधूरा ही रहता. इस बीच संगीता स्वरूप जी का ई मेल जिसमे उन्होंने मेरी अनुपस्थिति (ब्लागजगत से) का कारण जानने की इच्छा व्यक्त किया है, अभिभूत कर गया. ब्लागजगत की शायद यही तो उपलब्धि है. आज यहाँ मैं उसी 100 वीं रचना का लिंक दे रहा हूँ जो मैने लगभग एक माह पूर्व ब्लाग पर पोस्ट किया था, जिन्होंने पहले ही पढा है उनका आभार और जिन्होने नहीं पढा है उनसे पढ़ने का आग्रह. नई रचना एक दो दिन में ...

धन्यवाद !

'जज्बात' पर मेरी 100वीं रचना 

ठूस ठूस कर भरी जा रही है रोशनी ~ ~